आगरा। मिल, कारखाना, फैक्टरी व अन्य व्यवसायों के लिए लागू होने जा रहे लाइसेंस शुल्क का रविवार को विरोध शुरू हो गया। उद्यमी संगठनों का कहना है कि पहले से ही टीटीजेड में उद्योग-धंधों पर बंदिशें हैं। ऐसे में लाइसेंस शुल्क उद्योगों की राह में बाधा बनेगा। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि आय बढ़ाने के लिए शुल्क बढ़ाना जरूरी है।
जिला पंचायत में 1997 से सिर्फ दुकानों से लाइसेंस शुल्क लिया जाता था। यह शुल्क 50 रुपये से 1000 रुपये तक था। 2018 में शासन ने मिल, कारखाना, फैक्टरी व उद्योग-धंधों के लिए नया मॉडल बायलॉज जारी किया। जिसे सात साल बाद जिला पंचायत क्षेत्र में लागू करने की तैयारी है।
इसका प्रस्ताव 12 जनवरी को बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इसमें एक हजार से एक लाख रुपये तक शुल्क देय होगा। अमर उजाला ने रविवार के अंक में यह खुलासा किया, जिसके बाद उद्यमियों ने शुल्क लागू करने पर आपत्ति जताते हुए विरोध का रास्ता इख्तियार किया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया का कहना है कि पंचायत की आय बढ़ाने के लिए इसे लागू करना जरूरी है। सात साल से मॉडल बायलॉज रुके हुए हैं। 12 जनवरी को बोर्ड बैठक में लाइसेंस शुल्क पर चर्चा होगी। प्रस्ताव पास होने के बाद इसे क्रियान्वयन के लिए प्रशासन को भेजा जाएगा।
शीतगृह पर तीन गुना शुल्क अनुचित
- अधिकांश शीतगृह जिला पंचायत क्षेत्र में स्थित हैं। शीतगृह पर तीन गुना शुल्क बढ़ाना तर्कसंगत नहीं। यह उद्योग किसानों के उत्पादों की सुरक्षा के लिए है। शीतगृहों के हित में प्रस्ताव वापस लिया जाए। - भुवनेश अग्रवाल, अध्यक्ष, आगरा कोल्ड स्टोरेज ऑनर्स एसोसिएशन
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग होगा प्रभावित
- खाद्य प्रसंस्करण प्लांट पर एक लाख रुपये लाइसेंस शुल्क से कारोबार प्रभावित होगा। नए प्लांट की स्थापना में बाधा आएगी। टीटीजेड के कारण पहले ही उद्योग-धंधे आगरा में प्रभावित हैं। - आशीष गर्ग, उपाध्यक्ष, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
शुल्क से बढ़ जाएगी उत्पादन लागत
- शहरी क्षेत्र में कोई मिल, कारखाना, फैक्टरी नहीं लग सकती। जिला पंचायत क्षेत्र में ही स्थापना संभव है। ऐसे में लाइसेंस शुल्क बढ़ने से उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। जिसका बोझ आम जनता पर पड़ेगा। - मनीष अग्रवाल, प्रदेश सचिव, लघु उद्योग भारती
भुवनेश अग्रवाल
भुवनेश अग्रवाल