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आगरा के जलकल विभाग में ठेकेदार को रेबड़ियों की तरह दे दिए 8 करोड़

Thu, 06 Jul 2017 06:08 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला आगरा
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आगरा नगर निगम - फोटो : अमर उजाला
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जलकल विभाग ने जिस काम के लिए 12 जुलाई 2016 को 8.44 करोड़ का पूरा भुगतान कर दिया, वह अभी तक  अधूरा है। इसमें से ज्यादातर काम फर्म आरएसआर इंफ्राबिल्ट प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया। विकास कार्यों की गुणवत्ता देखना तो दूर अफसरों ने यह भी नहीं देखा कि काम पूरा है या अधूरा। आंख मूंदकर समस्त भुगतान कर दिया। मुख्य अभियंता ने काम पूरा न होने की रिपोर्ट भी दी लेकिन अफसरों ने एक्शन लेने के बजाय चुप्पी साध ली।
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पार्षदों ने हंगामा किया, तो मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने अपर आयुक्त आरपी सिंह को जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद ठेकेदार ने रातों रात अधूरा काम पूरा कराने की कोशिश की, तो लोगों ने विरोध कर दिया। नतीजा यह है कि काम अभी तक अधूरा है, भुगतान हो चुका है। देखना यह है कि जांच कब पूरी होती है। ठेका दिए जाने और ठेकेदार को भुगतान किए जाने के दौरान जलकल की जीएम मंजू रानी गुप्ता थीं। उनका अब तबादला हो चुका है। यह पैसा 13 वें वित्त का था। इससे विकास कार्य कराने का प्रस्ताव 28 अक्तूबर 2015 को स्वीकृत किया गया था।

सैयद पाड़ा क्षेत्र में पार्षद राजपाल यादव, लोहामंडी क्षेत्र के पार्षद हेमंत प्रजापति ने 30 जून को मंडलायुक्त से शिकायत की। इस पर मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त आरपी सिंह को जांच सौंपी। इसी फर्म ने उपकरणों की खरीद भी की है। बताया जा रहा है कि इसमें भी गोलमाल हुआ है। इसकी भी जांच कराई जा रही है। पार्षदों ने जांच अधिकारी को इस गोलमाल के साक्ष्य भी मुहैया कराए हैं।
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पार्षद हेमंत प्रजापति ने बताया कि जलकल विभाग ने 13 वें वित्त आयोग की धनराशि से हुए कार्यों में बड़ा घोटाला किया है। विकास कार्य और उपकरण में भी खेल किया गया है। मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं तो ठेकेदार अब काम करने पहुंच रहे हैं। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 

नगर आयुक्त अरूण प्रकाश का कहना है कि कल नगर निगम सदन की बैठक में यह मुद्दा उनके समक्ष आया है। इस मामले में जलकल विभाग से पत्रावली तलब की गई है। जलकल विभाग के जीएम चंदन सिंह ने 10 दिन के अंदर पत्रावली उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया है। यदि पत्रावली नहीं मिलती है तो एफआईआर कराई जाएगी।
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ऐसे किया गया बंदरबांट

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21 मार्च 2016 : जलकल विभाग की तत्कालीन जीएम मंजू रानी गुप्ता ने  नगर आयुक्त को पत्र लिखा कि 13 वें वित्त आयोग की राशि 8.50 करोड़ रुपये विकास कार्यों के टेंडर जारी करके कार्य आदेश किए हैं, लिहाजा जलकल विभाग को धनराशि हस्तांतरित कर दी जाए।

30 मार्च 2016 : जीएम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखा, विभिन्न फर्मों को कार्य माप के आधार पर 8.44 करोड़ भुगतान करना है। लिहाजा यह धनराशि जलकल को हस्तांतरित की जाए।

31 मार्च 2016 : तत्कालीन नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने विकास कार्यों का सत्यापन कराए बगैर ही 8.41 करोड़ रुपये  जलकल विभाग को रिलीज कर दिए।

12 जुलाई 2016 : जलकल विभाग ने सभी फर्मों को पूरा भुगतान कर दिया, उनसे कार्य पूरा होने का प्रमाण पत्र भी नहीं लिया गया।

06 अगस्त 2016 : पार्षद हेमंत प्रजापति ने इस मामले की शिकायत  नगर आयुक्त से की। उन्होंने मुख्य अभियंता को मामले की जांच के आदेश दिए।

11 अगस्त 2016 : मुख्य अभियंता ने  जांच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्मों को दिए गए टेंडर के हिसाब से विकास कार्य अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं।
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यह काम रह गए अधूरे

सीवर लाइन का कार्य नहीं हुआ - फोटो : अमर उजाला
- मोहल्ला बेसन की बस्ती में 200 एमएम (225 मीटर) सीवर लाइन का कार्य नहीं हुआ।

- मोहल्ला कटघर में 200 एमएम (225 मीटर) सीवर लाइन का कार्य भी प्रारंभ नहीं हुआ था।

- मोहल्ला कटघर में मकान नंबर 21/126 के पास 200 एमएम (60 मीटर) सीवर लाइन का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ।

- नाला पुल छिंगा मोदी के बराबर पेयजल की 160 एमएम लाइन का कार्य नहीं हुआ।

- मोहल्ला जोशियान वाल्मीकि बस्ती और मोहल्ला नत्थीखेत में सीवर कार्य बंद कर दिया गया था।
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