एत्मादपुर के लखनामई में दोहरे हत्याकांड के तीसरे दिन भी पुलिस की आंखें नहीं खुलीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सोनू की हत्या किए जाने के साफ संकेत मिले हैं। उसके हाथों पर गन पाउडर नहीं मिला है। जबकि पुलिस सबूतों को दरकिनार कर एक लड़की द्वारा बताई ‘आत्महत्या’ की कहानी पर विश्वास कर रही है। उधर, सोनू के घरवालों ने ‘आन’ के लिए हत्या करने का आरोप लड़की के घरवालों पर लगाया है। बुधवार को उन्होंने एत्मादपुर थाने में हंगामा भी किया। लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। इस पीड़ित परिवार ने 48 घंटे में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी।
बताते चलें, एत्मादपुर के लखनामई गांव में नौ फरवरी की शाम को मालती और उसके प्रेमी सोनू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों के शव मालती के घर से कुछ दूरी पर खेत में पड़े मिले थे। इस मामले में मालती के पिता की ओर से मुकदमा दर्ज हो चुका है।
बुधवार की दोपहर को सोनू के घरवाले संवाई के दो दर्जन ग्रामीणों के साथ थाना एत्मादपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंगलवार को मामले को ऑनर किलिंग बताते हुए मालती के पिता उम्मेद सिंह और तीन अन्य लोगों के खिलाफ सोनू और मालती की हत्या किए जाने की तहरीर दी गई थी। लेकिन अब तक मुकदमा नहीं लिखा है। इस पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। बाद में पुलिस ने पहले मुकदमे में ही जांच करने की बात कही, लेकिन सोनू के घरवाले मुकदमे की बात पर अड़े रहे। मृतक सोनू के पिता और चाचा विजय सिंह ने कहा है कि 48 घंटे में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो वे भूख हड़ताल करेंगे।
पहले सबूत लाओ फिर लिखेंगे मुकदमा
तीन दिन में हत्या में प्रयुक्त तमंचा तक बरामद नहीं कर पाने वाली पुलिस ने मृतक सोनू के घरवालों से कहा कि वे हत्या का सबूत लाकर दें, तभी रिपोर्ट दर्ज होगी। अब सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने खेत पर प्रेमी युगल के शव मिलने के बाद घटनास्थल से साक्ष्य नहीं जुटाए? क्या हर मामले में पुलिस पीड़ित पक्ष से सबूत मांगने के बाद ही रिपोर्ट लिखती है। साक्ष्य एकत्रित करना पुलिस का काम है या पीड़ित का।
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यक्ष प्रश्न : आखिर क्यों ‘सबूत’ किए जा रहे दरकिनार
आगरा। दोहरे हत्याकांड में जिस तरह के तर्क पुलिस अधिकारी दे रहे हैं, उन्हें गले से उतारना मुश्किल है। उनका कहना है कि चचेरी बहन घटना की चश्मदीद है। अगर चचेरी बहन के बयानों को ही सच मान लिया जाए तो एक और सवाल उठता है कि उसने सोनू के साथ एक अन्य साथी के आने की बात कही थी। वह साथी कौन था? पुलिस अब तक मृतक सोनू के साथी को क्यों नहीं तलाश कर पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि सोनू को गोली तकरीबन तीन फीट की दूरी और मालती को तकरीबन दो फीट की दूरी से मारी गई। ऐसा आत्महत्या के मामलों में नहीं होता है। सोनू की गर्दन पर खरोंच के निशान भी मिले। कनपटी पर ब्लैकनिंग नहीं आई। जबकि सटाकर गोली मारने पर ब्लैकनिंग आती है। अगर सोनू ने तमंचे से गोली चलाई तो हाथ में गन पाउडर का अवशेष मिलना चाहिए था, लेकिन नहीं मिला। तमंचे का गायब होना भी बड़ा सवाल है। मोबाइल भी नहीं मिला। आखिर इन सवालों को पुलिस नजरअंदाज क्यों कर रही है? क्या पुलिस पर कोई दबाव है?