डीवीआर को आखिर एक बार फिर लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। शनिवार को एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने सभी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद इसे सिपाही के सुपुर्द किया। इसमें विशेष रूप से 26, 27, 28 अप्रैल और 16 मई के फुटेज चेक किए जाएंगे।
श्री पारस अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को आखिर एक बार फिर लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। शनिवार को एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने सभी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद इसे सिपाही के सुपुर्द किया। इसमें विशेष रूप से 26, 27, 28 अप्रैल और 16 मई के फुटेज चेक किए जाएंगे। डीवीआर में डाटा डिलीट भी होने की आशंका है। इसे फोरेंसिक वैज्ञानिक जुटाने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
26 जून को डीवीआर को कब्जे में लेने के बाद लखनऊ लैब भेजा गया था। उसे वहां से वापस कर दिया गया। इस पर आगरा लैब भेजा गया। मगर, यहां भी नहीं लिया गया। बाद में गाजियाबाद भेजने की तैयारी थी। मगर, अब उसे फिर से लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। इसी लैब में डीवीआर की जांच होती है। इससे फुटेज निकाले जाएंगे। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि डीवीआर को लखनऊ लैब भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट जल्द मंगवाई जाएगी। सोमवार को लैब में इसे रिसीव करा दिया जाएगा।
मोबाइलों की जांच आगरा लैब में होगी
पुलिस ने अस्पताल में वीडियो बनाने के शक में एक युवक और व्यापारी का मोबाइल जब्त किया था। इन मोबाइलों की जांच अब आगरा लैब में ही होगी। एसपी सिटी ने बताया कि मोबाइलों से डिलीट डाटा रिकवर किया जाएगा। अगर, वीडियो डिलीट किया गया होगा तो वह आ जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आईएमए ने पांच बार देखा वीडियो
आईएमए जांच समिति की 26वीं बैठक शनिवार को हुई। इसमें मरीजों और उनके परिजनों से बात करने के अलावा मॉकड्रिल के वीडियो पर चर्चा की गई। वीडियो को पांच बार देखा गया और डॉ. अरिन्जय जैन के लिए तीन सवाल तैयार किए गए। इन तीन बातों में सबसे प्रमुख है ‘सोने के भाव से ऑक्सीजन खरीदने को तैयार हूं’। इस पर समिति ने आकलन किया कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी और डॉक्टर साहब किसी भी कीमत पर ऑक्सीजन खरीदने को तैयार थे।
दूसरी बात है ‘मॉकड्रिल की और 96 में से 22 मरीज छंट गए’ इस पर समिति ने आकलन किया कि ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हुई तो हो सकता है कि पांच मिनट के लिए मॉकड्रिल की हो, जिससे अति गंभीर मरीजों को चिह्नित कर लिया या फिर इस बीच उनके साथ कोई अनहोनी हो गई हो। तीसरी बात है ‘ऑक्सीजन बंद होते ही मरीज नीले पड़ गए’। जांच समिति के अनुसार यह बात मॉकड्रिल को पुख्ता करती है। इन तीनों बातों पर डॉ. अरिन्जय से जवाब मांगा जाएगा।
‘जैसे-तैसे लाए थे ऑक्सीजन, 15 मिनट बाद ही मरीज की हो गई मौत’
श्री पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को भर्ती बताए गए 91 मरीजों से बात करने की जिम्मेदारी अब दो सदस्यों को सौंपी है। अब तक 52 मरीज और परिजनों से बात हो गई है। समिति सदस्य से बातचीत में मृतकों के परिजनों ने बताया कि 25 को ऑक्सीजन की किल्लत बताई, 26 को अस्पताल स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए। खुद ऑक्सीजन की व्यवस्था करने को कहा। जैसे-तैसे सिलिंडर लेकर आए और मरीज को ऑक्सीजन लगा दी, लेकिन 15 मिनट बाद ही मौत होने की जानकारी दी। यह बातें मरीजों की समिति ने नोट कर ली हैं।
वर्किंग कमेटी की बैठक टली
आईएमए की जांच समिति की सभी मरीजों से बात नहीं हो पाने के कारण वर्किंग कमेटी की बैठक टल गई है। यह शनिवार को होने वाली थी, लेकिन अब दो-तीन दिन बाद होगी। अभी तक की जांच रिपोर्ट को कंपाइल करने की जिम्मेदारी अन्य सदस्य को दी है। शनिवार को बैठक में जांच समिति के संयोजक डॉ. सुधीर धाकरे गैरहाजिर रहे। डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, डॉ. संजय चतुर्वेदी, अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय, डॉ. पंकज नगायच और डॉ. अनूप दीक्षित रहे।
पूरी रिपोर्ट को कंपाइल कर रहे
समिति की अब तक जांच की पूरी रिपोर्ट की कंपाइल किया जा रहा है। सोमवार को जांच समिति के सदस्य बैठक करेंगे, इसके बाद अन्य बिंदुओं पर चर्चा होने के बाद शेष मरीजों से बात कर रिपोर्ट बनेगी। जांच पूरी होने के बाद वर्किंग कमेटी की बैठक में आईएमए अध्यक्ष को यह सौंपा जाएगा। - डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, सदस्य, जांच समिति