पद्मश्री डॉ. एसएन सुब्बाराव
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आगरा में गांधीवादी विचारक पद्मश्री डॉ. एसएन सुब्बाराव का कहना है कि मोहम्मद अली जिन्ना बंटवारे के जिम्मेदार नहीं हैं। वो धर्मनिरपेक्ष सोच के थे, लेकिन वीर सावरकर ने सबसे पहले अपनी पुस्तक 'हिंदुत्व' में दो राज्यों की परिकल्पना की थी।
डॉ. सुब्बाराव रविवार को बालूगंज में सामाजिक कार्यकर्ता शशि शिरोमणि के यहां मीडिया से मुखातिब हुए। वो आगरा में स्वाधीनता सेनानी सेठ अचल सिंह की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे।
एएमयू में जिन्ना की तस्वीर विवाद पर उन्होंने कहा कि जिन्ना पहले धर्मनिरपेक्ष थे। 1934 तक पाकिस्तान का नाम भी सामने नहीं आया था। वीर सावरकर ने वर्ष 1924 में अपनी पुस्तक '‘हिंदुत्व’' में दो राज्यों की परिकल्पना पेश की थी, जिसमें एक हिंदू और दूसरा मुस्लिम राष्ट्र था।
डॉ. एसएन सुब्बाराव को किया सम्मानित
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सुब्बाराव ने कहा कि देश में आठ माह की बच्ची और 10 साल की बच्चियों से छेड़खानी, दुराचार की घटनाएं रोकी जानी चाहिए। इस तरह की घटनाएं शर्मनाक होती हैं। छवि धूमिल करती हैं। मृत्युदंड उपाय नहीं है, सोच बदलनी होगी।
उन्होंने कहा कि गांधी के देश में सहिष्णुता खत्म हो रही है। लोग गाड़ी पार्किंग में खड़ी करने के विवाद में हत्या कर रहे हैं। ये देश का चरित्र नहीं है। गांधीजी ने हिंसामुक्त, नशामुक्त भारत की परिकल्पना की थी। कोई भूखा नहीं सोए, यह भी गांधीजी चाहते थे।
उन्होंने कहा कि केवल गांधी के चश्मे का इस्तेमाल करने से देश नहीं बदलेगा। लोग भ्रष्टाचार करके विदेश भाग रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में नशाबंदी से हालात सुधरे हैं। अपराध कम हुआ है।
नशाबंदी पूरे देश में लागू होनी चाहिए। दलितों पर अत्याचार की घटनाएं खतरनाक हैं। इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्हें भी समानता से जीने का अधिकार है।