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डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कर्मचारी नेता को जेल

Wed, 02 May 2018 11:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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अागरा विवि - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का कर्मचारी नेता हरीश कसाना बुधवार को जेल चला गया। बीएड के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में उसने लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट में सरेंडर किया था। 
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उसके खिलाफ संपत्ति की कुर्की का नोटिस जारी हो चुका था। एसआईटी उसकी तलाश कर रही थी लेकिन जांच एजेंसी को चकमा देकर वो खुद कोर्ट पहुंच गया।

यह प्रकरण 2004 का है। बीएड की 4000 फर्जी मार्कशीट जारी कर दी गई थी। इस प्रकरण में विवि के 30 कर्मचारी और अधिकारी गिरफ्तार किए जा सकते हैं। इनके खिलाफ एसआईटी को साक्ष्य मिल चुके हैं। एक एक कर सभी पर शिकंजा कसा जा रहा है। 

हरीश कसाना विवि कर्मचारी संघ का अध्यक्ष रह चुका है। वो लिपिक के पद पर तैनात है। फर्जी मार्कशीट केस में उसके वारंट जारी हो जाने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। एसआईटी के अधिकारियों ने बताया कि हरीश कसाना ने लखनऊ में सरेंडर किया। एसआईटी के मामले सीबीआई कोर्ट में ही
जाते हैं।

 

चार कर्मचारी पहले जा चुके जेल

इसी प्रकरण में एसआईटी ने 25 अक्तूबर 2017 को विवि के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया था। वे भी जेल गए थे। इनमें स्वामी शरण, सतेंद्र पाल सिंह, लक्ष्मण सिंह और साकेत प्रसाद शामिल हैं।

एसआईटी ने बेसिक शिक्षा विभाग को बीएड की फर्जी मार्कशीट का ब्योरा भेज दिया है। यह बात भी सामने आ चुकी है कि इन मार्कशीट से लगभग 2500 शिक्षक बने हैं। 

इनकी बर्खास्तगी के लिए नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन बाद में कार्रवाई को रोक दिया गया। इस पर एसआईटी ने बेसिक शिक्षा विभाग को रिमाइंडर जारी कर पूछा है कि किस किस शिक्षक पर कार्रवाई की गई?

 
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यह है मामला

विवि में 2004 में बीएड की 8000 सीटें थीं जबकि प्राइवेट कॉलेजों ने अपनी मर्जी से मैनेजमेंट कोटा बढ़ाकर दाखिले दे दिए। इससे कुल 12000 अभ्यर्थी हो गए। बाद में 4000 को फर्जी मार्कशीट जारी कर दी गई। 

विवि कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से गोपनीय चार्ट में इनका विवरण दर्ज कर फर्जी को असली बनाने की कोशिश की गई। मैनपुरी के युवक सुनील की शिकायत पर हाईकोर्ट ने इस प्रकरण की एसआईटी जांच के आदेश दिए।
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