कासगंज के तीर्थनगरी सोरों सूकरक्षेत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पर्यटन स्थल के रूप में विकास करने के एलान को प्रशासन ने अमलीजामा पहनाने के लिए कवायद शुरू कर दी है।
एक माह में पर्यटन स्थल के मानकों के अनुरूप सोरों के विकास का खाका खींचा जाएगा। इसके लिए इंजीनियरिंग के तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी। सोरों को खूबसूरत बनाने के लिए योजनाएं बनाईं जाएंगी।
सोरों सूकरक्षेत्र पौराणिक तीर्थस्थल है। इस तीर्थ की महिमा पुराणों में वर्णित है। इसे आदितीर्थ माना जाता है। इस नगरी का वर्षों पुराना इतिहास है। इसके विशेष धार्मिक महत्व के कारण अनेक संतों, महापुरुषों का यहां आगमन हुआ है।
जिलाधिकारी ने दिए निर्देश
वर्षों से इस क्षेत्र में विकास की डोर टूटी हुई है। तीर्थनगरी के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराए जाने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से यहां विकास की उम्मीद बंधी है।
तीर्थस्थल के विकास के लिए बनाए जाने वाली डीपीआर में तीर्थनगरी के संतों, समाजसेवी संगठनों का मत भी लिया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी ने दिशा निर्देश जारी किए हैं।
50 करोड़ तक का होगा डीपीआर
जिलाधिकारी आरपी सिंह ने अमर उजाला को बताया कि यह डीपीआर 30 करोड़ से 50 करोड़ का बनाया जाएगा। इसमे सोरों के सुंदरीकरण और विकास व जनसुविधाओं से संबंधित वृहद स्तर पर प्रस्ताव शामिल होंगे।
तकनीकी सलाहकारों से भी परामर्श किया जाएगा। जिससे बेहतर ढंग से कार्य योजना तैयार हो सके। अधिक से अधिक लोग इस कार्य योजना से लाभांवित हों। तीर्थनगरी में सुंदरीकरण ऐसा हो जिससे पर्यटक आकर्षित होकर यहां आएं। जिससे विकास के और रास्ते भी खुल सकें।
क्या होगा खास
- हरिपदी गंगा को दिया जाएगा आकर्षक रूप, लगाई जाएगी रैलिंग।
- मेला ग्राउंड को बनाया जाएगा आकर्षक, विकसित होंगे पार्क।
- एक ऑडिटोरियम डेढ़ हजार से दो हजार लोगों की क्षमता का बनाया जाएगा।
- तीर्थनगरी में प्रकाश की उत्तम व्यवस्था कायम की जाएगी।
- तीर्थपर्यटकों के लिए पेयजल का संकट न हो, इसके लिए प्रबंध होंगे।
- सोरों-लहरा मार्ग को अच्छा बनाया जाएगा।
- परिक्रमा मार्ग पर सुविधाएं सृजित की जाएंगी।
- पौराणिक स्थलों के संरक्षण पर र कया जाएगा कार्य।