इनर रिंग रोड पर धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि अब उन्हें मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी जमीन वापस चाहिए। किसानों ने मुआवजा सहमति पत्र भरने से इन्कार कर दिया है।
आगरा के इनर रिंग रोड पर आंदोलित किसानों ने रविवार को मुआवजा के लिए सहमति पत्र भरने से इन्कार कर दिया। सहमति पत्र भरवाने पहुंचे एसडीएम व तहसीलदार को बैंरग लौटना पड़ा। किसान मुख्यमंत्री से वार्ता और जमीन वापसी की मांग पर अड़े हैं। आठवें दिन किसानों का आंदोलन जारी है। इनर रिंग रोड की एक लेन भी बंद है। किसानों को विभिन्न संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इधर, भूमि अधिग्रहण के 15 साल बाद किसान मुआवजा लेने को भी तैयार नहीं हो रहे। किसान नेता प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रभावित किसानों को जमीन वापस चाहिए।
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उधर, क्षेत्रीय विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने कहा कि वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देने या जमीन वापस करने का निर्णय कैबिनेट में होगा। इस संबंध में शासन से वार्ता चल रही है। जल्द आंदोलन खत्म होगा। इनर रिंग रोड स्थित रायपुर व रहनकलां में 444 हेक्टेयर भूमि का 15 साल से किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। जिसके रोध में अब किसान जमीन वापसी पर अड़े हैं।
जमीन वापस करने पर प्रशासन व एडीए सहमत नजर नहीं आ रहा। इस स्थिति में किसान आंदोलन और उग्र रूप धारण कर सकता है। ठंठ से ठिठुरते हुए किसान रविवार को दिनभर शीतलहर से जूझते रहे। कई किसानों की तबीयत बिगड़ गई है। धरने पर उपेंद्र सिरकवार, नत्थू काका, गोविंद ठाकुर, बाल योगी, वीरेंद्र सिसोदिया, अजय सिंह, कुलदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
किसान आंदोलन के समर्थन में आई सपा
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा, महासचिव सुरेंद्र चौधरी के नेतृत्व में सपाइयों ने किसानों का समर्थन किया। रविवार को सपा नेता किसानों के धरने में शामिल हुए। सपाइयों ने एक स्वर में कहा कि किसानों की जमीन वापस होनी चाहिए। 15 साल में भाजपा सरकार किसानों को मुआवजा तक नहीं बांट पाई। उन्होंने भाजपा सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप भी लगाए। इस दौरान डॉ. वीरेंद्र चौहान, सपा के प्रदेश सचिव रामगोपाल बघेल, पवन प्रजापति, हरेंद्र तोमर, प्रहलाद गुर्जर, जितेंद्र क, पंकज कंसना, अखिलेश यादव, असलम वारसी, पप्पू चौधरी आदि मौजूद रहे।