मौसम में बदलाव और वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। इन दिनों बच्चों में खांसी, बुखार, गले में खराश और सुस्ती जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हर खांसी को केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह सामान्य वायरल या एलर्जी के अलावा टीबी (क्षय रोग) का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों में वायरल के दौरान खांसी-बुखार सामान्य है, लेकिन लक्षणों की अवधि पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि खांसी लगातार बनी हुई है, बच्चा सुस्त रहता है, उसे भूख कम लग रही है या वजन नहीं बढ़ रहा है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा देना हानिकारक हो सकता है।
बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 1 जनवरी 2026 से 8 सितंबर 2026 तक 0 से 14 वर्ष की आयु वर्ग में आंकड़े चिंताजनक हैं। इस दौरान 1,882 मरीज मिले हैं। उपचार के बाद 492 ठीक हो गए हैं।वर्तमान में 1,381 मरीजों का उपचार चल रहा है। संवाद
गैस्ट्रिक लैवेज तकनीक से हो रही 0 से 5 साल के बच्चों की जांच
छोटे बच्चे अक्सर जांच के लिए बलगम का नमूना नहीं दे पाते। इस समस्या के समाधान के लिए 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में गैस्ट्रिक लैवेज तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें चिकित्सकीय निगरानी में पेट से नमूना लिया जाता है, जिससे टीबी के सटीक जीवाणुओं की पहचान हो जाती है।
बच्चों में टीबी के प्रमुख लक्षण
यूपी टीबी टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह के अनुसार यदि बच्चे में लक्षण दिखें तो जल्द जांच कराएं।
-लंबे समय तक या बार-बार खांसी रहना
-लगातार बुखार आना, वजन न बढ़ना या अचानक वजन गिरना
- अत्यधिक सुस्ती और भूख न लगना, खांसी के साथ बलगम आना
बचाव के उपाय और डॉक्टर की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान दें। बच्चों को बाहर की खुली खाद्य सामग्री, गोलगप्पे, चाट, गन्ने के रस और बाजार की बर्फ के इस्तेमाल से बचाएं। सांस लेने में तकलीफ या खांसी गंभीर होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।