सीएमओ कार्यालय परिसर में औषधि विभाग की ओर से जब्त की गई दवाएं खुले में कचरे की तरह पड़ी रहीं, जिनमें से अधिकांश बारिश में सड़कर खराब हो गईं। मामला सामने आने के बाद शासन ने रिपोर्ट तलब की है और सहायक आयुक्त औषधि ने जांच शुरू कर दवाओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए हैं।
कार्रवाई में जब्त की गई दवाओं की बेकदरी पर शासन गंभीर है। पूरे मामले की औषधि विभाग से रिपोर्ट तलब की गई है। मंगलवार को औषधि विभाग की टीम ने मौके पर जाकर दवाओं का हाल देखा। सहायक आयुक्त ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा।
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औषधि विभाग ने अवैध गोदाम, मेडिकल स्टोर से जांच के दौरान नकली, सैंपल समेत अन्य दवाओं को जब्त किया था। इनको सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय सीएमओ कार्यालय स्थित मलेरिया विभाग के पास खुले में फेंक दिया गया। बारिश में अधिकांश दवाएं सड़-गल गईं। इस बारे में खबर प्रकाशित होने के बाद शासन ने सहायक आयुक्त औषधि से रिपोर्ट तलब की है।
सहायक आयुक्त औषधि अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया के मौके पर जाकर स्थिति देखी गई। दवाएं बेहद खराब हालत में हैं। मैंने और औषधि निरीक्षक ने हाल ही में जॉइन किया है। ऐसे में पूर्व में तैनात रहे औषधि निरीक्षकों से रिपोर्ट मांगी है। उनसे पूछा गया है कि ये दवाएं किस मामले में किस मेडिकल फर्म, गोदाम या मेडिकल स्टोर से बरामद की हैं। बुधवार को इन दवाओं को सुरक्षित स्थान पर रखवाया जाएगा। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेज रहे हैं।
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दवा माफिया को बचाने की साजिश
आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि औषधि विभाग की कारवाई दिखावे भर के लिए है। जिस तरह से जब्त दवाओं को बाहर फेंका गया है। उससे साबित हो रहा है कि यह सबूत मिटाने की साजिश है। यह बड़े दवा माफिया हैं, जिनकी ऊपर तक पहुंच है। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही अन्य दवाओं के रखरखाव के बारे में भी जांच कराई जाए।
दवाओं के ढेर में निकला था सांप
सीएमओ कार्यालय में खुले में पड़ी औषधि विभाग की जब्त दवाओं में बीते दिनों सांप भी निकल आया था। इससे मलेरिया विभाग में अफरा-तफरी मच गई थी। इससे विभाग के कर्मचारी एहतियात भी बरत रहे हैं।