बागपत जेल में नौ जुलाई की सुबह की गई पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या में एक नहीं, बल्कि तीन पिस्टल इस्तेमाल की गई थीं। इसका खुलासा आगरा फोरेंसिक लैब में भेजे गए मौके से बरामद कारतूसों के खोखों के परीक्षण के दौरान हुआ।
इन खोखों पर तीन अलग-अलग तरह के निशान थे। ये निशान पिस्टल के पिन के होते हैं, जो गोली छूटते समय कारतूस पर पिन की चोट लगने से बनते हैं। बागपत पुलिस ने दस खोखे परीक्षण के लिए भेजे थे।
इनके साथ एक पिस्टल भी भेजा गया था जो गैंगस्टर सुनील राठी की निशानदेही पर जेल से ही बरामद हुआ था। यह माना जा रहा था कि सुनील राठी ने इसी पिस्टल से मुन्ना की हत्या की है। हालांकि यह बात इसलिए गले नहीं उतर रही थी कि उसने बड़ी आसानी से पिस्टल बरामद करा दिया था।
तब भी यह शक था कि वह कोई चाल चल रहा है, क्योंकि अगर फोरेंसिक परीक्षण में इस पिस्टल से गोली चलना नहीं पाया गया तो उसे इसका फायदा मिलेगा। दूसरा, सवाल यह था कि इतनी सारी गोलियां इतने कम समय में एक ही पिस्टल से कैसे चलाई जा सकती हैं।