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कासगंज: गंगानदी में होगा डॉल्फिन और कछुओं का संरक्षण, ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक

Wed, 06 Jan 2021 12:33 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज

सार

  • वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड की टीम ने खोजे अवसर, शुरू किया काम
  • गंगा में अक्सर नजर आती हैं डॉल्फिन, लोगों के बीच रहता है कौतूहल
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नदी में डॉल्फिन का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कासगंज में लगातार वन एवं जलीय जीव जंतुओं के संरक्षण की कवायद जारी है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड की टीम ने जिले में बहती गंगा की धार में डॉल्फिन और कछुआ संरक्षण की संभावनाएं तलाशी हैं। इन संभावनाओं को मूर्त रूप देने के लिए टीम लगातार काम कर रही है।
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पूर्व के समय में दो बार डब्लूडब्लूएफ की टीम यहां दौरा कर चुकी है। इस दौरे में गंगा में डॉल्फिन के होने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं कछुआ संरक्षण के लिए भी अनुकूल वातावरण टीम को मिला है। ऐसी स्थिति में टीम ने यहां डॉल्फिन संरक्षण और कछुआ संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। वन विभाग के अधिकारी भी इस टीम के साथ जुटे हैं। जिससे जलीय जीव जंतुओं के संरक्षण की मुहिम आगे बढ़ सके। डब्लूडब्लूएफ टीम 9 डॉल्फिन होने का अनुमान जता चुकी है।

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अब यह टीम फिर से यहां पहुंचकर डॉल्फिन की गणना करेगी। जिससे सही आंकड़ा सामने आ सके। वहीं डॉल्फिन की संख्या में कैसे वृद्धि हो इस पर भी टीम का जोर होगा। गंगा के नरौरा वैराज पर काफी डॉल्फिन देखी जाती हैं। यही डॉल्फिन नरौरा से आगे जिले की सीमा में आ जाती हैं। गंगा का वातावरण डॉल्फिन के अनुकूल है। ऐसी स्थिति में इनको संरक्षण देकर उनकी संख्या को बढ़ाया जा सकता है।

क्या है डॉल्फिन मछली
यह समुद्री स्तनधारी जीव है। विशेषज्ञों के मुताबिक इनका आकार 1.2 मीटर तक होता है। इनका वजन 400 किलोग्राम से अधिक तक हो जाता है। वैसे तो यह खासकर समुद्र में पाई जाती हैं, लेकिन अब यह गंगानदी में भी देखी गई हैं।

गंगाकिनारे के ग्रामीणों को किया जाएगा प्रशिक्षित
डब्लूडब्लूएफ और वन विभाग की टीम डॉल्फिन एवं कछुआ संरक्षण के लिए गंगाकिनारे गांव के लोगों एवं गंगा की खादर में पालेज लगाने वाले वाले ग्रामीणों को डॉल्फिन और कछुआ संरक्षण के लिए जानकारी देकर प्रशिक्षित करेंगी। जिससे किसान इनके संरक्षण से जुड़ सकें। कछुओं के अंडों को किस तरह से संरक्षित किया जाए इसके बारे में भी विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। वहीं डॉल्फिन जैसी मछलियों का शिकार न हो पाए इसके लिए भी ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।

गंगा से नहर में आ गई थी मरी हुई डॉल्फिन 
पिछले माह गंगानदी से मरी हुई डॉल्फिन नरौरा बैराज से हजारा नहर में आ गई। लोगों ने मरी हुई डॉल्फिन को देखा तो इसकी जानकारी नरौरा खंड को दी। सूचना पर वन विभाग की टीम डॉल्फिन की तलाश करती रहीं, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
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आंकड़े की नजर से
- 127 किलोमीटर तक डब्लूडब्लूएफ की टीम ने किया था स्थलीय सर्वेक्षण।
- 30-30 किसानों के ग्रुप बनाकर दिया जाएगा प्रशिक्षण।

गंगानदी में डब्लूडब्लूएफ की टीम ने डॉल्फिन मछलियों की पुष्टि की है। इसी सप्ताह डब्लूडब्लूएफ की टीम जिले में आएगी। डॉल्फिन मछलियों की गणना होगी और कछुआ संरक्षण के लिए विशेषज्ञ किसानों और वन विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
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