सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिकंदरा रोड, शाहगंज स्थित आगरा हेल्थ केयर पैथोलॉजी लैब पर छापा मारा। ये लैब भी 65 लैब-अस्पताल चलाने वाले डॉ. मनीष कुमार वार्ष्णेय के नाम से पंजीकृत थी।
कृष्णा नगर बोदल शाहगंज डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी सेंटर की जांच करने भी टीम पहुंची। इसका पंजीकरण डॉ. रविंद्र सिंह के नाम से है। रविंद्र सिंह के नाम से भी 34 पैथोलॉजी लैब और अस्पताल पंजीकृत हैं। दोनों में डॉक्टर नहीं मिले, उपकरण भी गंदे थे। प्रशिक्षित टेक्नीशियन भी नहीं थे। यहां से 65 से अधिक मरीजों की जांच रिपोर्ट जब्त की गई है। इसमें पंजीकृत डॉक्टर के नाम पर संचालक ने फर्जी हस्ताक्षर कर खून की जांच रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को दे रहे थे। इनको नोटिस भी दिए जा रहे हैं।
आगरा हेल्थ केयर पैथोलॉजी लैब
ये डॉ. मनीष कुमार वाष्र्णेय के नाम से पंजीकृत है। ये नहीं मिले। इनके नाम से खून की जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर भी थे। टीम को संचालक नरेश सक्सेना ने बताया कि डॉ. मनीष अभी यहां से निकले हैं। प्रभारी ने पूछा कि ये किसके हस्ताक्षर हैं तो संचालक बोला कि डॉक्टर साहब के हैं, तेवर दिखाते हुए कहा कि लो डॉक्टर साहब से फोन पर बात कर लो। इस पर प्रभारी भड़कते हुए बोले कि बात मत कराओ, सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाओ। इसमें नहीं मिले तो फर्जीवाड़े में दोनों के नाम एफआईआर करता हूं। इस पर संचालक के तेवर ढीले पड़ गए और लैब सील न करने की गुहार लगाने लगा।
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डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी सेंटर
ये डॉक्टर रविंद्र कुमार के नाम से पंजीकृत थी। ये भी लैब में नहीं मिले। यहां दो-तीन मरीज रिपोर्ट लेने और जांच कराने के लिए आए हुए थे। मौके पर संचालक एके गुप्ता मिला, वह खुद को डॉक्टर बता रहा था। प्रभारी ने चिकित्सकीय डिग्री दिखाने के लिए बोला तो कहा कि पीएचडी धारक हूं और मैं ही जांच कर रिपोर्ट बनाकर देता हूं। यहां डॉक्टर के नाम पर पर्चे मिले, जिस पर संचालक ने ही फर्जी हस्ताक्षर कर रिपोर्ट तैयार की। ये लाइसेंस और डॉक्टर-टेक्नीशियन की सूची नहीं दिखा पाया। यहां 30-35 मरीजों की जांच रिपोर्ट भी मिलीं।
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