संवाद कार्यक्रम में चर्चा करते आईएमए के पदाधिकारी
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. अशोक शिरोमणि ने बताया कि झोलाछाप की सूची स्वास्थ्य विभाग को दी जा चुकी है। इनको ही बंद करा दिया जाए तो लगभग पूरी समस्या ही खत्म हो जाए। सचिव डॉ ओपी यादव ने कहा कि झोलाछाप के यहां आशा और एंबुलेंस चालक मरीजों के मुख्य जरिया हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर सख्ती बरते तो रैकेट कमजोर होगा।
लेप्रोस्कॉपिक सर्जन डॉ सुनील शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ब्लाक स्तर पर झोलाछाप चिह्नित करे, इसमें आईएमए भी साथ देगी। इन पर मुकदमा दर्ज करने पर ही नकेल डाली जा सकती है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज नगायच ने कहा कि ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारी झोलाछाप को चिह्नित कर इन पर तत्काल कार्रवाई करे, इससे इनका रैकेट आगे नहीं बढ़ेगा।
कार्यक्रम में सर्जन डॉ अनूप अंबेश बोले, जिस पैथी का डॉक्टर है, उसी से इलाज करे। बोर्ड पर अपना नाम-डिग्री लिखे, जिससे झोलाछाप आसानी से पकड़ में आएंगे। डॉ. प्रीति भारद्वाज ने कहा कि डॉक्टरों के संस्थानों पर सख्ती से पहले झोलाछाप की दुकान बंद कराई जाएं, इससे गरीब मरीजों की जान नहीं जाएगी।