हाल-फिलहाल, पहले तीन नवजात शिशु। फिर कैंसर मरीज की मौत। कारण लापरवाही। पहले प्रशासन फिर शासन ने एक्शन लिया। पर हालात नहीं सुधरे। बात एसएन मेडिकल कालेज अस्पताल की है। न डाक्टरों का रवैया बदला और न पैरामेडिकल स्टाफ का। आम दिनों का यह दर्द रविवार को कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है। इस रविवार के कुछ दृश्य आप भी देखिए-
दृश्य -1
समय: दोपहर 12 बजे
शाहगंज के धर्मा को इमरजेंसी से घड़ीवाली बिल्डिंग में शिफ्ट होना है। उन्हें एंबुलेंस (जो खुद जर्जर है। स्ट्रेचर में जंग लगी है) से भेज तो दिया गया वहां कोई वार्ड ब्याय नहीं है। धर्मा को बाहर उतारकर एंबुलेंस जा चुकी है। वह फर्श पर लेटा है। तीमारदार वार्ड ब्याय का इंतजार कर रहे हैं। विवश होकर वे खुद उसे वार्ड में ले जा रहे हैं।
दृश्य - 2
समय: दोपहर 12.15 बजे
घड़ी वाली बिल्डिंग में न डाक्टर हैं, न पैरा मेडिकल स्टाफ। कैंसर विभाग में सन्नाटा है। स्त्री रोग विभाग का हाल भी जुदा नहीं। किरावली के रमेश ने बताया कि उनकी पत्नी भर्ती है। सुबह एक बार नर्स और डाक्टर आते हैं, फिर कोई नहीं दिखता। रविवार को ओपीडी बंद रहती है, लेकिन वार्ड में डाक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ तो होना चाहिए।
दृश्य - 3
समय: दोपहर 12.30 बजे
बाहर से दवाइयां खरीदकर ला रहे एटा निवासी विनोद कुमार बता रहे हैं कि हर रोज 1200-1500 रुपये की दवाएं लानी पड़ रही है। डाक्टर कहते हैं कि मरीज को ठीक कराना है तो भले बाहर से लानी पड़े, दवाएं लानी तो पड़ेंगी न। बात सिर्फ दवा की नहीं है। तीमारदारों ने बताया सीरिंज और कॉटन तक बाहर से मंगवाई जा रही हैं।
और एक तस्वीर यह भी
एसएन के चीफ फार्मासिस्ट हरिओम कुलश्रेष्ठ ने इमरजेंसी के सीएमओ डा. आरबी लाल और डा. ब्रह्मदेव के खिलाफ प्राचार्य से शिकायत की है। उगाही तक के आरोप लगाए हैं। वहीं डा. ब्रह्मदेव ने बताया कि ड्यूटी में लापरवाही पर हरिओम की शिकायत प्राचार्य कार्यालय में की गई। उनका तबादला इमरजेंसी से ओपीडी में कर दिया गया। इससे बौखलाकर झूठे आरोप लगा रहे हैं।
चिकित्सकीय सेवाआें को दुरुस्त रखने के लिए विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं। यदि स्टाफ मरीजाें को शिफ्ट नहीं कर रहा, वार्ड में डाक्टर-नर्सिंग स्टाफ नहीं रहता तो एचओडी से जवाब मांगा जाएगा।
-डा. एसके गर्ग, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज
लापरवाही ने ली एक जान और अबकी इलाज में देरी
यमुनापार। एसएन मेडिकल कालेज अस्पताल की लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। इस बार इमरजेंसी में इलाज ्मिलने में हुई देरी से युवक की जान गई। आग से 80 फीसदी झुलसा अन्नू डेढ़ घंटे तक उपचार के लिए तड़पता रहा। इसके पहले आधा घंटे तक तो उसे वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर ही नहीं मिला। इसके एक घंटा बाद तक गुहार अनसुनी करते रहे डाक्टर परिवारीजनों के हंगामा करने पर जब तक हरकत में आए उसके प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
एत्माउद्दौला के रामनगर (कटरा वजीर खां) निवासी अन्नू (26) एक फैक्ट्री में काम करता था। रक्षाबंधन पर उसकी पत्नी रूबी ने मायके जाने की जिद करने लगी। मना करने पर दोनों में कहासुनी हुई इसके बावजूद रूबी मायके चली गई। इसी से क्षुब्ध अन्नू ने शनिवार की देर रात कमरे में केरोसिन उड़ेलकर आग लगा ली। घरवाले जब तक आग बुझाते, अन्नू 80 फीसदी तक जल चुका था। गंभीर हालत में उसे एसएन इमरजेंसी लाया गया। घरवालों का आरोप है कि इमरजेंसी में आधा घंटे तक स्ट्रेचर नहीं मिला। अन्नू एंबुलेंस में ही तड़पता रहा। वार्ड ब्वाय और नर्सिंग स्टाफ के न आने पर वे खुद ही उसे स्ट्रेचर पर डालकर अंदर ले गए। डाक्टरों से गुहार लगाई, लेकिन घंटे भर तक उपचार शुरू ही नहीं किया गया। जब उन्होंने हल्ला काटा तो डाक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया।