इस संबंध में खिदमत-ए-खल्क कमेटी की अगुवाई में हुई बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि गांव की भावी पीढ़ियों की सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। यह कोई व्यक्तिगत या धार्मिक प्रतिबंध नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक चेतना, जागरूकता और आत्ममंथन का परिणाम है। यह कदम कानूनी, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए उठाया गया है। कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के डीजे और आतिशबाजी पर दिए गए निर्देशों का भी संज्ञान लिया है।
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इसके अलावा कमेटी ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस सामूहिक संकल्प का उल्लंघन करता है तो उस पर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। गांव की खिदमत-ए-खल्क कमेटी और समस्त नागरिकों ने यह संकल्प लिया है कि वे इस सामाजिक सुधार को आत्म अनुशासन, सामूहिक सहयोग और जागरूकता से लागू करेंगे। इस फैसले को जनहित और सामाजिक सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना हम्माद साहब, कारी जुल्फिकार साहब, मौलाना अब्दुल खालिद साहब बरकाती, मौलाना अजमत उल्लाह साहब, हाफिज इलियास साहब, हाफिज शाहिद हुसैन साहब समेत लोग मौजूद रहे।