सोरों (कासगंज)। दशकों बाद इस बार दीपावली त्योहार पर विशेष संयोग बन रहा है। शनिवार को एक ही दिन दो तिथियों का मिलन बहुत ही शुभ माना गया है। इस बार चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने से नरक चतुर्दशी एवं दीपावली पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक दोनों ही तिथियों को दिन सुबह शाम गाय के घी का दीपक मंत्रोच्चारण के साथ जलाने से नकारात्मक ऊर्जा शुरू होगी और धन वैभव की प्राप्ति होगी।
हर साल दीपोत्सव त्योहार पांच दिन का होता था। इस बार तिथियां तो पांचों रहेंगी लेकिन चार दिन ही त्योहार मनाया जाएगा। चतुर्दशी शुक्रवार की देर शाम हो रही है जो शनिवार दोपहर को समाप्त हो जाएगी। उसके बाद अमावस्या लगेगी। जिस कारण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और अमावस्या का एक ही दिन शुभ संयोग मिल रहा है।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इससे सुख-समृद्धि और धन-वैभव के लिए विधि-विधान पूजा करें। पौराणिक मान्यता के अनुसार नवचतुर्दशी को दीपदान करने से लंबी आयु प्राप्त होती है। इस दिन घर की साफ-सफाई का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा दीपावली पर दीपक जलाने एवं मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। दोनों तिथियों में शनिवार को सुबह शाम गाय के घी का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
यह है दीपक जलाने का महत्व:
धन त्रयोदशी त्योहार से लेकर भैया दूज तक दीपदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि दीप ज्योति से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख समृद्धि और आयु, आरोग्य की वृद्धि होती है। गाय के घी के दीपक से आसपास का वातावरण रोगाणु मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है। इसके अलावा हमारे मन का अज्ञान रूपी अंधकार भी प्रभु समाप्त करते हैं।
इस तरह जलाएं दीपक:
दीपावली त्यौहार पर मां लक्ष्मी की पूजा का दीपक जलाते समय वेद मंत्रों का उच्चारण करें। जमीन पर दीपक रखने से पहले अन्न जैसे गेहूं, जौ, चावल आदि की ढेरी बनाकर उसी पर दीपक रखें। ध्यान रखें कि पूजा के बीच दीपक बुझे नहीं।
यह है शुभ मुहूर्त:
- नरक चतुर्दशी त्योहार शुक्रवार सांय 5:59 बजे से शुरू होगा, जो शनिवार दोपहर 5:47 तक रहेगा।
- अमावस्या शनिवार दोपहर 5:48 से शुरू होगी जो देर रात तक रहेगी
- दीपावली पूजा का शुभ मुहूर्त शनिवार शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे एवं दूसरा मुहूर्त रात 12:22 बजे से 2:39 बजे तक रहेगा
इस मंत्र का करें उच्चारण-
मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदां, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।
मंत्र का अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली आरोग्य और धन संपदा देने वाली शत्रु की बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।
ज्योतिषाचार्य की बात
दशकों बाद यह संयोग बना है कि चतुर्दशी और अमावस्या तिथि एक साथ ही ऐसे में एक ही दिन नरक चतुर्दशी और दीपावली त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे। यह बहुत ही शुभ संयोग है। ऐसे संयोग यदा कदा बनते हैं। इस संयोग में पूजा अर्चना धन, वैभव, सुख आरोग्य की वृद्धि होगी। - पंडित वंशीधर द्विवेदी, सोरों।