फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2025: दिवाली की धूम...दीपों से जगमग हुआ हर घर, आतिशबाजी की रोशनी में नहाया आसमान

Mon, 20 Oct 2025 08:17 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा में दिवाली का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। सुबह से शुरू हुई पटाखों की गूंज शाम होते-होते तेज हो गई। दीपों और झालरों की रंग-बिरंगी रोशनी में घर जगमग दिखे।
विज्ञापन
आतिशबाजी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा में दीपोत्सव के पर्व पर खुशियों के दीप घर-घर में जगमग हुए। ताजनगरी में जमकर आतिशबाजी हुई। बंदनवार से सजे घरों को रंगबिरंगी बिजली की झालरों के साथ रंगोली से सजाया गया। शाम होते ही घरों और प्रतिष्ठानों में शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश और महालक्ष्मी का पूजन किया गया। महालक्ष्मी के स्वागत के लिए पूरा शहर सज-धजकर तैयार था। 
विज्ञापन


शहर के गली-मोहल्ले, कॉलोनी, बाजार, शोरूम सतरंगी रोशनी से जगमग दिखे। हर कोना फूलों से महका। प्रार्थना की कि मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। मुख्य मंदिरों में सजावट हुई। 

हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर संपूर्ण अयोध्या को रोशन किया था। साथ ही समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य भी इसी दिन हुआ था। दिवाली के शुभ अवसर पर भक्त माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, श्रीराम दरबार और कुबेर की पूजा की जाती है।
विज्ञापन


 

ज्योतिषिचार्य डॉ. पूनम वाष्णेय ने बताया कि अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 3:45 मिनट से 21 अक्तूबर शाम 5:55 मिनट पर समाप्त होगी। दिवाली रात्रि का पर्व है, जिसका संबंध प्रदोष काल व निशीथ काल से है। यह दोनों एक साथ 20 अक्तूबर को मिल रहे हैं जिसके कारण दिवाली 20 अक्तूबर को मनाई जाएगी। 

दिवाली पूजन के लिए सोमवार को शुभ मुहूर्त शाम 7:29 मिनट से लेकर 9:26 मिनट तक है। 21 अक्तूबर को भी उदय तिथि में अमावस्या है। दुकानों, ऑफिस और प्रतिष्ठानों में दिवाली का पूजन किया जा सकता है। बुधवार को गोवर्धन पूजा और बृहस्पतिवार को भाई-दूज का त्योहार मनाया जाएगा।

 
विज्ञापन

ऐसे करें लक्ष्मी-गणेश का पूजन
ज्योतिषाचार्य डाॅ. अरविंद मिश्र ने बताया कि शुभ मुहूर्त में गणेश-लक्ष्मी के पूजन से सुख समृद्धि आती है। राहुकाल में पूजा करने से बचना चाहिए। शाम को शुभ मुहूर्त में ईशान कोण में चाैक या रंगोली बनाकर उस पर चाैकी रखें। चाैकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश, देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। 

चाैकी पर गणेश जी के सामने दाहिनी ओर नवग्रह स्थापित करें और पास में जल से भरा कलश रखें। कलश में काैड़िया, सिक्के, सुपारी और गंगाजल डालें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाना चाहिए। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगा लें। मिट्टी के बड़े दीये से कलश ढक दें। दीपक में चावल भरें और लाल कपड़े में जटा नारियल लपटेकर रख दें। 

परिवार के सभी सदस्यों के साथ पूजा कर सकते हैं। मां लक्ष्मी के समक्ष लाल कपड़े की थैली में 5 काैड़ी, 5 गोमती चक्र, हल्दी की गांठ रखें। पूजन के बाद इस पोटली को तिजोरी या लाॅकर में रख लें। मां लक्ष्मी, प्रथम पूज्य गणपति, धन के देवता कुबेर को फल, फूल, पंचमेवा, खील-बताशे-खिलाैने के साथ मिठाई अर्पित करें।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें