भारत श्रीलंका संवाद कार्यक्रम में मंच से बोलतीं कुलपति प्रो. आशु रानी।
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी (केएमआई) तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ के हिंदी विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रसार व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसका विषय भारत एवं श्रीलंका के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ था।
विद्यापीठ के निदेशक प्रदीप श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत और विषय प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि श्रीलंका की सिंहली भाषा पर संस्कृत का गहरा प्रभाव है। इसके कारण वह हिंदी के निकट है। भाषा के आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक पुल और मजबूत हो सकता है। शोध परियोजनाओं, शैक्षिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक शिक्षण के माध्यम से यह मजबूत बनेगा।
अतिला कोतलावत निदेशिका, हिंदी संस्थान श्रीलंका एवं स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, कोलंबो ने कहा कि भारत सदैव श्रीलंका का गुरु देश रहा है। श्रीलंका में हिंदी का व्यापक प्रभाव है। चाहे गीत हो, भोजन अथवा भारतीय परिधान। उन्होंने बताया कि श्रीलंका में रामायण से जुड़े 18 महत्वपूर्ण स्थल हैं, जो दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को दर्शाते हैं। के. कंचनमाला पूर्व रेडियो सीलोन हिंदी उद्घोषिका व निदेशिका, सुहृदभूमि हिंदी निकेतन ने रेडियो सीलोन की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसने भारत-श्रीलंका सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। कार्यक्रम में डॉ. केशव शर्मा, पल्लवी आर्य, डॉ. राजकुमार, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. प्रदीप वर्मा, डॉ. आदित्य प्रकाश, डॉ. संदीप कुमार शर्मा, डॉ. मोहनी दयाल, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव, डॉ. अंगद कुमार और कृष्णकांत आदि उपस्थित रहे।