खेरागढ़। क्षेत्र के गांव गढ़रपुरा (सरेंडा) में रविवार को राजपूताना सरदारी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के दूर-दराज क्षेत्रों से आए वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में समाज के पुरातन इतिहास, वंशावली और पूर्वजों की परंपराओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि पूर्वज दलकू बाबा और बलकू बाबा दो भाई थे, जिनकी संतानों को सिकरवार गोत्र के राजपूत के रूप में जाना जाता है। बताया गया कि सिकरवार राजपूतों का मूल निकास राजस्थान के सीकर क्षेत्र से हुआ था। वहां से आने के बाद दोनों भाई गढ़रपुरा में बसे। बाद में दलकू बाबा मध्य प्रदेश में जाकर बस गए, जबकि बलकू बाबा गढ़रपुरा में ही रहे। ग्रामीणों ने बताया कि मध्य प्रदेश में दलकू बाबा की प्रतिमा स्थापित हो चुकी है और अब गढ़रपुरा में भी उनकी मूर्ति स्थापना को लेकर समाज के लोग एकत्रित हुए हैं। बैठक में वक्ताओं ने भारत के प्राचीन इतिहास, राजपूताना संस्कृति और वंश परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का आह्वान किया।
इस दौरान लोकेश सिंह सिकरवार ने आगंतुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एडवोकेट हरिओम सिकरवार ने की। बैठक में समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।