आगरा में 22 वर्ग फुट की दुकान, लेकिन नगर निगम से मिले नोटिस में 46 वर्ग फुट का टैक्स मांगा जा रहा है। व्यापारी हैरान हैं कि निगम ने पास की गली को उनकी दुकान का हिस्सा कैसे बना दिया। ऐसे ही अन्य मामलों में पुराने शहर के दुकानदारों पर 530 रुपये सालाना टैक्स की जगह 1620 रुपये की डिमांड वाला नोटिस पहुंच गया है। साईं कंस्ट्रक्शन कंपनी के जीआईएस सर्वे के बाद भेजी जा रही नोटिसों से लोग परेशान हैं। वहीं पार्षदों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
व्यापारियों ने नगर आयुक्त से कहा है कि उन्हें 22 वर्ग फुट की जगह अगर 46 वर्ग फुट में बनी दुकान का नोटिस दिया है तो जमीन पर कब्जा भी दिलाएं। इसके बाद ही वह जमा कराएंगे। नगर निगम ने दो साल से शहर के वार्डों में गृहकर, संपत्तिकर के लिए जीआईएस आधारित सर्वे कराया है। जिसमें एक लाख संपत्तियों की संख्या बढ़ गई है। पूर्व में नगर निगम सीमा में 3.50 लाख संपत्तियां थीं, पर अब 4.50 लाख संपत्तियां हो गईं। इनमें से 97 हजार संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में गड़बड़ियों के कारण ही रार मची है। लोग पार्षदों के पास पहुंच रहे हैं और उनकी शिकायतों को अफसर सुन नहीं रहे।
न जाने कहां से सर्वे किया
पार्षद रवि माथुर ने कहा कि न जाने कहां से सर्वे कर नोटिस भेजे गए हैं। हमने सदन के अधिवेशन में इस पर सवाल लगाया है। इन गड़बड़ियों को दूर किया जाए।
हर घर, दुकान का सर्वे गलत
पार्षद शिरोमणि सिंह का कहना है कि घटिया आजम खान क्षेत्र में हर घर, हर दुकान का सर्वे गलत किया है। सत्यापन के लिए कह रहे हैं तो अधिकारी जवाब नहीं देते।
अधिवेशन में प्रस्ताव लगाया
पार्षद आशीष पाराशर ने बताया कि गृहकर के नोटिसों को निरस्त कराया जाएगा। हमने अधिवेशन में प्रस्ताव लगाया है। लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। ,
कई केस मेरे सामने आए
मेयर नवीन जैन ने बताया कि कई केस मेरे सामने भी आए हैं। हमने अधिकारियों से कहा है कि जो गड़बड़ियां हुई हैं, उनका समाधान करें।