फिरोजाबाद में दिगंबर जैन सुपार्श्वनाथ घेरखोखल मंदिर नगर के प्राचीन मंदिरों में एक है। कोलकाता निवासी हुलासराय अग्रवाल राजा परिवार ने इस मंदिर को स्थापित कराया था। यह मंदिर दो सौ वर्ष से अधिक पुराना है। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में चमत्कारी प्रतिमाएं विराजमान हैं।
मंदिर कमेटी के पदाधिकारी बताते हैं कि चंद्रप्रभु मंदिर में विराजमान स्फटिकमणि की प्रतिमा चंद्रवार में निकली थी। उसे सर्वप्रथम इसी मंदिर में विराजमान किया गया था। वर्तमान में इस मंदिर में मूलनायक सुपार्श्वनाथ भगवान की चमत्कारी प्रतिमा है, जो कसौटी के पत्थर से बनी हुई है।
पीडी जैन इंटर कॉलेज के सामने लगने वाला जैन मेला भी इसी मंदिर से शुरू होता है। चांदी का रथ एवं उस पर विराजमान भगवान महावीर की प्रतिमा भी इसी मंदिर से रथ पर विराजमान होती है। यहीं मेला का समापन भी होता है। अनंत चतुर्थदशी के एक दिन बाद इस मंदिर में जलधारा महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
मंदिर में 13 वेदियों पर विराजमान हैं भगवान की प्रतिमाएं
दिगंबर जैन सुपार्श्वनाथ घेरखोखल मंदिर
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जनपद के अन्य जैन मंदिरों की अपेक्षा इस मंदिर में सबसे ज्यादा वेदियां हैं। 13 वेदियों पर अनेक जिन प्रतिमाएं विराजमान हैं। जिनमें वासुपूज्य भगवान, शांतिनाथ भगवान, चंद्रप्रभु भगवान, आदिनाथ भगवान, सुपार्श्वनाथ भगवान, पार्श्वनाथ भगवान, चौबीस तीर्थकर एक वेदी पर विराजमान हैं। भगवान महावीर, पंचवालयति की विराजमान है।
दिगंबर जैन मंदिर कमेटी घेरखोखल के अध्यक्ष अनिल जैन ने बताया कि मंदिर का इतिहास गौरवशाली है, चंद्रप्रभु मंदिर से भी पुराना यह मंदिर है। चंद्रप्रभु मंदिर में स्थापित भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा पहले इसी मंदिर में विराजमान थी। यह मंदिर अत्यंत चमत्कारी है, जो भी कोई मनोकामना मांगता है तो उसकी पूरी होती है।
भक्त अजय जैन का कहना है कि फनधारी सुपार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाएं काफी कम देखते को मिलती हैं। भगवान सुपार्श्वनाथ की ऐसी प्रतिमाएं प्राचीनता को दर्शाती हैं। इस मंदिर की सबसे खास चमत्कारिक बात यह है कि यहां फनधारी सुपार्श्वनाथ की प्रतिमा है।