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मधुमेह रोगी नहीं सह पाए स्टेरॉयड, 98 मरीजों में मिला ब्लैक फंगस

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आगरा।
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संक्रमित हुए मधुमेह रोगी उपचार के दौरान स्टेरॉयड की हैवी डोज सहन नहीं पाए। जीवन जरूर बचा लेकिन ब्लैक फंगस के शिकार हो गए। एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लैक फंगस वार्ड में भर्ती हुए सभी 98 मरीज मधुमेह रोगी ही मिले। चिकित्सकों की स्टडी में सामने आया कि 60 फीसदी मरीजों में ब्लैक फंगस की वजह स्टेरॉयड के हैवी डोज रहे।
एसएन कॉलेज के ब्लैक फंगस वार्ड में कुल 98 मरीज भर्ती हुए। इन सभी ने संक्रमित होने पर निजी अस्पतालों में इलाज कराया था। 60 साल से अधिक उम्र के 72 मरीज थे। 10 ऐसे मरीज रहे, जो संक्रमण के इलाज दौरान मधुमेह से पीड़ित हुए। स्टडी में पाया गया कि कोरोना से संक्रमित होने पर 59 मरीजों को स्टेरॉयड दिया गया, इनमें 38 देहात के थे। 35 मरीजों को इलाज के दौरान स्टेरॉयड के हैवी डोज दिए गए। ठीक होने के 10-15 दिन बाद इनमें ब्लैक फंगस के लक्षण मिले। नाक, गाल, जबड़ा, तालू, मस्तिष्क तक फंगस पहुंच गया और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
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तीन को लगी वैक्सीन, 75 के करने पड़े ऑपरेशन
वार्ड में आगरा समेत 11 जिलों से मरीज भर्ती हुए। तीन मरीजों को टीके का पहला डोज लग चुका था, इनकी हालत गंभीर नहीं हुई। बाकी के 72 मरीजों के ऑपरेशन करने पडे़। उनकी आंख, गाल, तालू, जबड़ा, गाल की हड्डी तक निकालनी पड़ी। 26 मरीज दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आए, जिनके पहले ही ऑपरेशन हो चुके थे।
स्टेरॉयड लेने वाले नौ मरीजों में दोबारा फंगस के लक्षण मिले
स्टेरॉयड का हैवी डोज लेने वाले नौ मरीजों में ठीक होने के बाद दोबारा फंगस के लक्षण मिले। वार्ड प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप ने बताया कि फंगस से ठीक हो चुके लोगों को 10 से 15 दिन बाद फॉलोअप के लिए बुलाते हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई जांच से नौ लोगों में फंगस दोबारा मिला। राहत की बात रही कि दोबारा फंगस में हालत गंभीर नहीं मिली। एंटी फंगस इलाज से यह ठीक हो रहे हैं।
गंभीर मरीजों की तो आंखें तक निकालनी पड़ीं: डॉ. सिंह
स्टडी करने वाले ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी और ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि संक्रमित होने पर आईसीयू में भर्ती या फिर हाईफ्लो ऑक्सीजन पर रहे गंभीर मरीजों में ब्लैक फंगस ज्यादा खतरनाक मिला। नौ की तो आंखें ही निकालनी पड़ीं।
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मधुमेह रोगियों में स्टेरॉयड के दुष्प्रभाव से फंगस: डॉ. सिंह
स्टडी करने वाली एसपीएम विभाग की डॉ. गीतू सिंह ने बताया कि मरीजों में ब्लैक फंगस की बड़ी वजह स्टेरॉयड रहा। इसके दुष्प्रभाव से नाक, तालु, गाल, दिमाग तक फंगस पहुंचा। मौत भी सबसे ज्यादा ऐसे ही मरीजों की हुई।
ये बरतें सावधानी
- बीमार होने पर चिकित्सक को दिखाएं। खुद से इलाज न करें।
- मधुमेह के स्तर को चिकित्सक की सलाह से नियंत्रित रखें।
- फंगस से ठीक होने के बाद फॉलोअप में जांच कराते रहें।
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