उत्तर प्रदेश के एटा जिले में डेंगू पिछले साल रिकॉर्ड ध्वस्त कर रहा है। अब तक 64 केस मिल चुके हैं, जबकि पिछले पूरे साल में 45 केस थे। सिलसिला अभी थम नहीं रहा, जबकि तापमान में भी कमी आ चुकी है। वहीं लगातार होने वाली मौत भी लोगों की चिंता का सबब बनी हुई हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग डेंगू से किसी भी मरीज की मौत की पुष्टि नहीं कर रहा है।
अगस्त तक डेंगू के मामले नियंत्रित थे और 4 ही केस मिले थे। सितंबर से इनका बढ़ना शुरू हुआ। अब तो यह स्थिति है कि हर दिन तीन-चार नए केस मिल रहे हैं। ये तो सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े हैं। जहां डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच कराई जाती है। इसके बाद ही केस घोषित किया जाता है। इसमें रैपिड कार्ड की जांच को महत्व नहीं दिया जाता। जबकि निजी चिकित्सक रैपिड कार्ड की जांच से ही पॉजिटिव मानकर मरीज का उपचार शुरू कर देते हैं। इस तरह के मरीजों की संख्या रोजाना ही सरकारी और निजी अस्पतालों में लगभग 100 तक पहुंच जाती है।
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सफाई को लेकर बरती जा रही लापरवाही
इन दिनों गांव-गांव बुखार फैला हुआ है। इस मौसम में संचारी रोगों की आशंका के मद्देनजर पहले ही संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाने के निर्देश दे दिए गए थे। जिसके तहत लोगों को जागरूक करने के साथ ही गांवों में सफाई पर विशेष जोर दिया गया था। लेकिन लगातार बुखार और डेंगू के केस आने के बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। पंचायती राज विभाग के सफाई कर्मचारी कई गांव में तो बिल्कुल ही नहीं पहुंच रहे हैं।
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लगातार रखी जा रही नजर
सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बुखार और डेंगू के मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। डेंगू से किसी मरीज की मौत अब तक जिले में नहीं हुई है।
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डेंगू से बचाव के लिए ये करें
डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के जोखिमों को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप मच्छरों को काटने से बचाव के लिए प्रयास करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें और पानी एकत्रित न होने दें। साफ-स्थिर पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए पानी को बदलते रहें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसके अलावा अगर 2-3 दिनों तक बुखार की समस्या है तो डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच कराएं।