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कासगंज बवालः 'बेटे की मौत पर राजनीति नहीं, उसका शहीदों जैसा चाहता हूं सम्मान'

Thu, 01 Feb 2018 10:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला कासगंज
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मृतक चंदन के पिता - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज दंगे में मृतक चंदन के पिता सुशील गुप्ता अपने बेटे की मौत पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं चाहते। वे कहते हैं कि उनका बेटा तिरंगे की खातिर शहीद हुआ है। उनका बेटा जिस सम्मान का हकदार है वह उसे मिलना चाहिए। सभी लोग इसके लिए मिलकर प्रयास करें।
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गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में चंदन की मौत के बाद उसके घर पर लोगों के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह छठवें दिन भी जारी रहा। 

मिलने आने वाले लोगों में समाजसेवियों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग भी शामिल हैं। कई राजनीतिक दलों के लोग उनके परिवार से मिलने में सफल रहे तो कुछ को प्रशासन ने सीमा पर ही रोक दिया। 
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चंदन के पिता बस एक ही बात कहते हैं कि उनके बेटे ने तिरंगा यात्रा निकालकर कोई गुनाह नहीं किया। यह यात्रा कोई पहली बार नहीं निकली। हर साल ही गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह की यात्राओं का आयोजन होता है। 

तिरंगा देश के मान सम्मान का प्रतीक है। इसकी खातिर अपनी जान देने के लिए हर देशवाशी के मन में जज्बा रहता है। वह तिरंगा यात्रा निकालने के लिए एक माह से अपनी तैयारी कर रहा था। उसने तिरंगा के सम्मान की खतिर अपनी जान दी है। 

वह शहीद हुआ है। जिस तरह से एक शहीद को सम्मान दिया जाता है उसी तरह का सम्मान उसके बेटे को मिलना चाहिए। बेटे के नाम पर एक चंदन चौक बनाया जाए। कहा कि उनका बेटा सेवा भावी था। वह गरीबों की मदद करते समय जाति और मजहब का भेद नहीं करता था।

बेटे के आखिरी बोल न सुन पाने की टीस है

बेटे के आखिरी बोल न सुन पाने की ठीस चंदन के पिता सुशील गुप्ता के मन में आज भी है। वे बात करते कारते भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखे नम हो उठती हैं।

चंदन के पिता बताते हैं कि तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए चंदन उत्साह के साथ घर से निकला। वह उनसे तिरंगा यात्रा निकलने के बाद घर लौटकर आने की कहकर गया। यात्रा के दौरान जैसे ही उनको झगड़े की सूचना मिली वे चिंतित हो गए। 

वे अपने दूसरे बेटे के साथ तुरंत कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने चंदन को फोन लगाकर बात करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। यात्रा के तहसील रोड पर जाने की जानकारी मिली। 

वे इस जानकारी के बाद जब तक वहां पहुंच पाते चंदन को गोली लग गई। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और गोली लगने से घायल होने के बाद भी वह दौड़कर कोतवाली तक आ गया और जमीन पर गिर पड़ा। 
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पुलिस ने उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए मेमो दिया। वे उसे गाड़ी में अपनी गोद में बैठाकर अस्पताल के लिए निकल पड़ा। उन्होंने रास्ते में अपने बेटे चंदन से बातचीत करने का काफी प्रयास किया, लेकिन चंदन कुछ भी बता नहीं सका। 

अस्पताल में उनके बेटे ने दम तोड़ दिया। हाथ में गोली का निशान देखने के बाद उन्हें इस बात का जरा भी अहसास नहीं था कि गोली बाह से लगती हुई शरीर में घुसकर गुर्दे में जा लगी है। 

यदि उन्हें इस बात का तनिक भी अहसास हो जाता तो वे उसे बाहर ले जाते। चंदन की मौत की इस घटना को छह दिन का समय बीत चुका है, लेकिन पिता के दिल की यह ठीस आज भी बरकार है।
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