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कासगंज बवालः इस ट्वीट को गंभीरता से ले लिया होता तो शायद न जलता कासगंज

Thu, 01 Feb 2018 09:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला कासगंज
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कासगंज सांप्रदायिक हिंसा से पहले किया गया ट्वीट - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज में गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई सांप्रदायिक हिंसा से पांच दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री को दंगे के अलर्ट का ट्वीट वायरल हो रहा है। 
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इस ट्वीट में एक फेसबुक पोस्ट पर दोनों समुदायों के बीच तकरार पर विवाद होने को दंगे की बजह होने का दावा किया गया था। 

ट्वीट करने वाले युवक का दावा है कि उसने गणतंत्र दिवस पर हुए दंगे से पांच दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ एवं यूपी पुलिस को अलर्ट करते हुए एक ट्वीट किया। 

इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक को फेसबुक संदेश के माध्यम से दंगे के संबंध में सचेत किया, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
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फेसबुक फोस्‍ट - फोटो : अमर उजाला
ट्वीट व फेसबुक सदेश में यह भी लिखा है कि धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतारे जाने के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन ने मंदिरों से तो इनको उतरवा दिया, लेकिन मस्जिदों से इनको नहीं उतरवाया गया। 

इसके बाद एक समुदाय के युवक ने फेसबुक पर एक नफरत भरी पोस्ट डाल दी। इसके बाद इस पोस्ट पर दोनों समुदायों के बीच फेसबुक पर कमेंट के माध्यम से प्रतिक्रियाएं आने लगी। 

यहां तक की एक दूसरे के मोहल्लों में आने पर देख लेने की धमकी तक दी गई। ट्वीट में यह भी लिखा है कि उसने दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास भी किए गए। इस ट्वीट को 51 बार शेयर किए जाने का भी जिक्र किया गया है। 

वायरल हुए इस ट्वीट से लोगों के बीच तरह तरह की चर्चाएं है। दंगे में चंदन गुप्ता की मौत को शासन प्रशासन की लापरवाही बता रहे हैं। ट्वीट सही है या गलत यह तो जांच के बाद ही सामन आ सकेगा।
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