अछनेरा। गांव नगला मंशा और धनौली के मध्य अरावली पर्वत श्रृंखला के गहरे पानी से भरे गड्ढे में डूबने से बुधवार को हुई दो मासूम छात्रों की मौत के बाद अगले दिन बृहस्पतिवार को पूरा क्षेत्र गमगीन नजर आया। नगला मंशा और मंगूरा गांव के कई घरों में चूल्हे नहीं जले। मृतकों के घर पर दिनभर सांत्वना देने पहुंचे रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ लगी रही। परिजन का करुण क्रंदन सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
बृहस्पतिवार दोपहर नगला मंशा निवासी मृतक देवमोहन की मां सीमा, बड़ी बहनें डॉली व ऊषा रो-रोकर बार-बार बेसुध हो रही थीं, तो पिता ईश्वरी प्रसाद गहरे सदमे में गुमसुम बैठे थे। दूसरी ओर मंगूरा निवासी मृतक करन अपने पिता का इकलौता पुत्र था। घर का चिराग बुझ जाने से मां राधा और बहन संध्या की चीखें थमने का नाम नहीं ले रहीं। किसान पिता रामेंद्र पूरी तरह टूट चुके हैं। शोकाकुल परिजन को संभालने पहुंचे ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
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गमजदा परिजन ने अवैध खनन पर उठाए सवाल
मृतक देवमोहन के चाचा सत्यवीर शर्मा ने क्षेत्र में बेखौफ चल रहे अवैध खनन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया हादसे के वक्त देवमोहन अपने दोस्त करन, राहुल, अंशु व लवकेश के साथ दो बाइकों पर बिना बताए पहाड़ की तरफ चला गया था। देवमोहन इससे पहले कभी पहाड़ की ओर नहीं गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ताज ट्रिपेजियम जोन में पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद पहाड़ों में लंबे समय से बेखाैफ अवैध खुदाई का खेल चल रहा। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर जाने से फिलहाल खनन बंद था, लेकिन खनन माफिया के खोदे गए जानलेवा गड्ढों ने दो मासूमों की बलि ले ली। परिजन और ग्रामीणों ने खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।