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UP: सजा-ए-मौत मिलते ही देखने लगा अपने हाथ, दरिंदे के मुंह से निकले ये शब्द...बालिका का मारते समय न आया रहम

Thu, 31 Oct 2024 02:45 PM IST
धीरेन्द्र सिंह दुर्गेश चाहर, आगरा

सार

सात साल की मासूम से दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। ये सजा सुनते ही आरोपी राजवीर जमीन पर बैठ गया। उसकी निगाहें अपनों को खोज रहीं थीं, लेकिन अदालत में कोई नहीं आया। 
 
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दोषी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में सात  साल की बालिका के साथ दरिंदगी हुई थी। उसे बेरहमी से मार दिया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट रूम में अधिवक्ताओं, पुलिस कर्मियों के साथ चाैकीदार राजवीर भी माैजूद था। ऑर्डर, आर्डर के साथ सजा सुनाई गई। यह सुनकर राजवीर जमीन पर बैठ गया। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि आखिरी सांस तक उसे फंदे पर लटकाया जाए।
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बार-बार रस्सी देख रहा था राजवीर
राजवीर बार-बार हाथ में बंधी रस्सी को देख रहा था। बात करने के लिए उसके घर से काेई परिजन नहीं आया था। उसने यहीं कहा कि घर में भाई-भाभी और भतीजे भी हैं। मगर, उससे मिलने कोई नहीं आया। अब जो होना था वो हो गया। क्या कर सकते हैं। वह इसके अलावा कुछ भी नहीं बोला।

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बालिका के पिता की आंखों से छलके आंसू
उधर, बालिका के पिता अदालत पहुंच थे। फांसी के सजा के बारे में सुनते ही उनकी आंखों से आंसू निकल आए। बेटी को न्याय मिलने की जानकारी तुरंत फोन कर अपनी मां और पत्नी को दी। पुलिस प्रशासन और अधिवक्ताओं के साथ अदालत के आदेश का आभार व्यक्त किया।

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घटना की टाइम लाइन
- 30 दिसंबर 2023 - दोपहर 1 बजे बालिका घर के बाहर से लापता हो गई।
- 30 दिसंबर 2023 - दोपहर 3 बजे परिजन ने तलाश शुरू की।
- 30 दिसंबर 2023 - शाम 5:30 बजे खाली पड़े प्लाॅट में शव मिला।
- 30 दिसंबर 2023 - रात 10:23 बजे पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया।
- 31 दिसंबर शाम 6 बजे आरोपी राजवीर को गिरफ्तार किया।
- 30 जनवरी 2024 को पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया।
- 13 मार्च 2024 को मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई
- 7 महीने 17 दिन चली सुनवाई।
- 30 अक्तूबर 2024 को दोषी राजवीर को फांसी की सजा सुनाई गई।

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15 लोगों की गवाही और साक्ष्य किए गए पेश
एडीजीसी सुभाष गिरी और विशेष लोक अभियोजक विजय किशन लवानियां ने आरोप साबित करने केे लिए और कठोर सजा दिलाने के लिए पैरवी की। वादी मुकदमा, पीड़िता की दादी, चाचा, मृत बालिका के साथ खेल रहे बालक, विवेचक विजय विक्रम सिंह, एसीपी डा. सुकन्या शर्मा सहित 15 गवाह अदालत में पेश हुए।

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दोषी को इन मुकदमों में मिली सजा
- दुष्कर्म और हत्या में मृत्युदंड और 1 लाख रुपये का जुर्माना।
- पॉक्सो एक्ट में भी मृत्युदंड
- साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में 7 साल का कारावास के साथ 25 हजार जुर्माना लगाया गया।
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