विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते शिक्षक
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आगरा के डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (औटा) ने विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को धरना दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने प्रोफेसर पद नाम दिए जाने और अन्य लंबित मांगों के पूरा न होने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
तीन जनवरी से सामूहिक अवकाश का एलान
औटा के अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध एडेड कॉलेजों के शिक्षक तीन जनवरी को सामूहिक अवकाश पर रहकर लखनऊ में आंदोलन करेंगे। फुपुक्टा (उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ) के आह्वान पर 24 दिसंबर को सभी राज्य विश्वविद्यालयों के मुख्यालय पर शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में एक दिवसीय धरने पर बैठे हैं।
शिक्षक 17 से 23 दिसंबर तक अपने महाविद्यालयों में काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे थे। साथ ही महाविद्यालय परिसर में भी धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
ये हैं मांगें
धरना प्रदर्शन में शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश सरकार से प्रमुख रूप से प्रोफेसर पद नाम के शासनादेश में संशोधन, पुरानी पेंशन की बहाली, पीएचडी के पांच इंक्रीमेंट का लाभ, अधिवर्षता आयु 65 वर्ष, अवकाश कटौती के लिए मनमानी तरह से जारी शासनादेश को वापसी, राज्य कर्मचारियों की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति का लाभ, आकस्मिक अवकाश 14 दिन, एकल स्थानांतरण के लिए 'एनओसी' की व्यवस्था समाप्त कर केवल 'नो ड्यूज' प्रमाण पत्र के आधार पर स्थानांतरण आदि मांगे पूरी किए जाने की मांग कर रहे हैं।
धरने में औटा के महामंत्री डॉ बीके चिकारा, फुपुक्टा महामंत्री डॉ. वाईएन त्रिपाठी तथा अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र चौहान ने प्रतिभाग किया। धरने में औटा के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग पालीवाल ने सरकार की मंशा को शिक्षकों के विरुद्ध बताया एवं संघर्ष के लिए सभी शिक्षकों को तैयार रहने का आह्वान किया।