कासगंज। मेहमान परिंदों के स्वागत की तैयारियां अभी आधी अधूरी हैं। दरियावगंज झील में पानी सूखता जा रहा है। जिले की लीडिंग झील होने के बावजूद इस झील के रखरखाव के बेहतर इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में चिंता इस बात की है कि मेहमान परिंदे यहां कलरव कैसे करेंगे। कहीं इस अनदेखी से मेहमान परिंदे जिले की जमीं से रूठ न जाएं।
जिले की दरियावगंज झील शासन स्तर से लीडिंग झील के रूप में सूचीबद्ध है। इस झील के संरक्षण के लिए यहां पिछले साल नमामि गंगे योजना के तहत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था, लेकिन यह प्रस्ताव कहां लंबित है। इसकी जानकारी विभाग को भी नहीं है। दिसंबर महीने में इस झील पर साइबेरिया, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, अफ्रीका, चीन, जापान आदि देशों से सरहदों को पार करते हुए मेहमान परिंदे यहां आते हैं। जल्द ही यहां परिंदों का आगमन होने की संभावना है, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हैं। सबसे बड़ी बाद सर्द मौसम में पक्षी पानी में कलरव करते हैं तो कभी उड़ान भरकर आकर्षण बढ़ाते हैं, लेकिन इस झील का पानी अब धीमे धीमे सूखता जा रहा है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत दिखाई दे रही है। हालांकि वन विभाग ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर सहयोग की अपेक्षा की है।
पूर्व में निकाला गया था रास्ता
पिछले साल जब दरियावगंज झील में पानी सूख रहा था तो तत्कालीन डीएम सीपी सिंह और तत्कालीन डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने प्रयास किए और रास्ता निकाला। पाया गया कि पानी के लिए एक रास्ता ऐसा है जो सीधे फर्रुखाबद ब्रांच की गोरहा नहर से मिलता है। यहां से उस समय पानी दरियावगंज झील तक पहुंचाया गया था।
वर्जन-
दरियावगंज झील में पानी सूख रहा है। सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर उनसे सहयोग की अपेक्षा की गई है। पक्षियों का आगमन भी जल्द शुरू होने लगेगा। डीएम से इस संबंध में वार्ता भी करेंगे। हरि शुक्ला, डीएफओ।
- वन विभाग ने दरियावगंज झील के लिए पानी मांगा है। अभी नहर में पानी कम है। जैसे जैसे पानी बढ़ जाएगा दरियावगंज झील को पानी उपलब्ध कराने का प्रयास रहेगा। उसके लिए माइनर का रखरखाव भी दुरुस्त कराएंगे- अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।