मैनपुरी। भोगांव के गांव छाछा में बंद पड़ी पराग डेयरी रोजगार का एक बड़ा साधन बन सकती है। क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को न केवल इससे रोजगार मिलेगा, बल्कि दूध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। किसान लंबे समय से डेयरी का संचालन शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
जीटी रोड पर गांव छाछा में डेयरी प्लांट की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी कि क्षेत्र में पशुपालकों को रोजगार मिलेगा लेकिन डेयरी प्लांट बंद होने से पशुपालकों को झटका लगा। डेयरी के करीब दस किलोमीटर के दायरे में तकरीबन 36 से अधिक गांव आते हैं। इनमें 20 हजार से अधिक पशुपालक हैं।
अगर डेयरी का संचालन शुरू होता है तो दूध उत्पादन बढ़ने के साथ ही किसानों को रोजगार का साधन भी मिलेगा। कृषि की दृष्टि से ये क्षेत्र गेहूं के उत्पादन के लिए बेहतर है। ऐसे में किसानों का पशुओं के लिए भूसा और दाना भी आसानी से मिल जाता है।
ऐसे में किसानों को सरकार से बहुत उम्मीद है।
लोगों की बात
अगर डेयरी प्लांट का संचालन शुरू हो जाए तो क्षेत्र में दूध का उत्पादन काफी बढ़ जाएगी। बिक्री का कोई साधन उपलब्ध न होने के चलते पशुपालकों को परेशानी होती है।
ब्रजेश शाक्य, नगला खंदारी।
दूध ऐसी वस्तु है, जिसकी खपत तत्काल होना जरूरी है। इसका भंडारण संभव नहीं है। इसी के चलते डेयरी बंद होने के बाद लोगों ने पशुओं को बेच दिया।
अफरोज मंसूरी, आलीपुर खेड़ा।
पहले जब पराग डेयरी का संचालन होता था तो दूध की सही कीमत मिलती थी। समय से भुगतान भी होता था। सरकार को फिर डेयरी शुरू करनी चाहिए।
रामनाथ कठेरिया, आलीपुर खेड़ा।
निजी डेयरियों पर अक्सर भुगतान को लेकर समस्या आती है। कई बार केंद्र संचालक रुपये नहीं देते हैं। पराग डेयरी पर लोगों का भरोसा है, इसे जल्द शुरू कराना चाहिए।
आदेश शाक्य, आलीपुर खेड़ा।