अपने माता-पिता और दादा के साथ गुरु
दो वर्ष की उम्र में अगर कोई बालक देश और दुनिया का ज्ञान अपने अंदर समाहित कर लेता है तो यह वास्तव में चौंकाने वाली बात होगी। इस बात का विश्वास भी जल्द नहीं होगा, लेकिन यह कारनामा वृंदावन में रहने वाले दो वर्ष के बच्चे गुरु उपाध्याय ने कर दिखाया है।
गुरु की उम्र अभी मात्र दो वर्ष पांच माह है और इस उम्र में भी गुरु की मेमोरी पावर (स्मरण शक्ति) सभी को चौंकाने वाली है। वृंदावन में गूगल गुरु नाम से मशहूर हो चुके नन्हें उस्ताद 100 से अधिक देशों की राजधानी और राष्ट्रीय ध्वजों की पहचान रखता है।
गुरु को कई बड़े संस्थानों ने सम्मानित भी किया है। गुरु के माता-पिता को अपने पुत्र की इस उपलब्धि पर गर्व है। पिता अरविंद कुमार उपाध्याय की इच्छा है कि वह गुरु के इस हुनर को देश की सेवा में समर्पित करें। वहीं मां प्रिया अपने पुत्र को एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के रूप में परिवर्तित देखना चाहती है।
गुरु उपाध्याय को देश की प्रख्यात संस्था इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने 4 जनवरी को बेहतरीन मेमोरी पावर के लिए पदक और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया है। वहीं, संस्था ग्लोबल चिल्ड्रेन रिसर्च भी गुरु को प्रथम श्रेणी की स्मरण क्षमता के खिताब से नवाज चुकी है। गुरु के दादा राधा वल्लभ उपाध्याय और योगमाया भी नाती पर गर्व करते हैं।