लोहामंडी चौराहे पर किदवई पार्क निवासी अक्की की पेट हाउस के नाम से दुकान है। टीम वहां पहुंची। कछुओं के बारे में बात की। इसके बाद मालिक का मोबाइल नंबर ले लिया। मालिक से फोन पर कछुओं खरीदने के लिए बात शुरू हो गई। 20 और 12 नाखून के हिसाब से कीमत तय की जाने लगी। उसने अपने घर बुला लिया।
पुलिस टीम ने दुकान मालिक के घर जाकर तीन कछुओं को बरामद कर लिया। इनमें एक कछुए के 20 नाखून थे। यह दुर्लभ प्रजाति का माना जाता है, जबकि 12-12 नाखून वाले दो कछुए थे। इनकी भी बाजार में मांग है।
अक्की से पूछताछ के बाद आवास विकास कालोनी के सेक्टर 12 स्थित सुनील की दुकान पर छापा मारा गया। वह एक्वेरियम और मछली बेचता है। इसकी आड़ में कछुओं की भी बिक्री करता है। उसके यहां से 12-12 नाखून वाले दो कछुए बरामद हुए। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। अक्की ने एक और आरोपी विष्णु का नाम लिया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में देर रात दबिश दे रही थी।
तिलकधारी कछुओं की मांग
पुलिस ने बताया कि लाल तिलकधारी कछुओं की सबसे ज्यादा मांग विदेश में होती है। यह तीन से साढ़े तीन लाख रुपयों में बिकता है। इसी तरह 20 नाखून वाले कछुओं की ज्यादा मांग है। इसकी भी कीमत काले बाजार में तीन लाख तक है। भारत में इनकी कीमत 50 हजार रुपये तक है। तिलकधारी कछुए की प्रजाति चंबल नदी में पाई जाती है। इनको बचाने के लिए वन विभाग की टीम कार्य कर रही है। तस्कर चोरी छिपे कछुओं को ले जाते हैं। इसके बाद इन्हें बेच दिया जाता है।
एसपी सिटी ने बताया कि बरामद कछुओं की कीमत तस्कर तकरीबन पांच लाख रुपये वसूलते। आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस को आशंका है कि चंबल सेंचुरी क्षेत्र से कछुओं को यहां लाया जा रहा है। इसके बारे में पुलिस टीम पड़ताल में जुटी है।
व्हाट्स एप पर होता कछुओं का सौदा
शहर से लेकर देहात में कई बार कछुओं की तस्करी पकड़ी जा चुकी है। पुलिस कई लोगों को गिरफ्तार करके जेल भी भेज चुकी है। इसके बावजूद कछुओं की तस्करी हो रही है। पुलिस को सूचना मिली है कि शहर के कई मछली बेचने वाले कछुओं को बेचते हैं। दुकानदार पुराने और मिलने वाले ग्राहक से ही कछुओं के बारे में बात करते हैं।
दुकान पर कछुओं को नहीं रखा जाता है। कछुए दिखाने के लिए घर पर बुलाया जाता है। यहीं पर रकम भी वसूल की जाती है। कई बार फोन पर ही पूरी डीलिंग की जाती है। बाहर से भी कछुओं को तस्कर लेकर आते हैं। जो लोग कछुओं को देखना चाहते हैं, उनके व्हाट्स एप पर फोटो भेजी जाती है। इसी पर रेट भी तय किया जाता है।