आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी के दो क्रेडिट कार्ड से 1.49 लाख रुपये निकाल लिए गए। आशंका है कि कार्ड के क्लोन बनाकर रकम निकाली गई। उन्होंने मामले में साइबर सेल में शिकायत की है।
दयालबाग स्थित फ्रेंड्स एंक्लेव निवासी देव प्रकाश शर्मा विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर के कंप्यूटर केंद्र में प्रोग्रामर हैं। उनके पास एचडीएफसी और आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड हैं। 24 सितंबर की रात को उन्होंने मोबाइल चार्ज करने के लिए स्विच ऑफ कर दिया था।
रात तकरीबन 12 बजे मोबाइल चालू किया तो उस पर मैसेज आने लगे। इनमें एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपये के ऑनलाइन लेन-देन की जानकारी थी। उन्होंने बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके जानकारी दी और क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक कराया।
इसके बाद उनके दूसरे क्रेडिट कार्ड से नौ हजार रुपये ऑनलाइन दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए। उन्होंने बैंक के नंबर पर कॉल करके यह कार्ड भी ब्लॉक करा दिया।
नहीं किया कार्ड का प्रयोग
देव कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने दो महीने से दोनों क्रेडिट कार्ड का कहीं प्रयोग नहीं किया है। उनके पास किसी व्यक्ति का कॉल भी नहीं आया है, जिसे वह जानकारी देते। ऐसे में क्रेडिट कार्ड के क्लोन बनाकर रुपये निकाले जाने की आशंका है।
एटीएम में छुपाकर डालें पिन नंबर
साइबर सेल के एक्सपर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी एटीएम में स्कीमर और कैमरा लगाते हैं। स्कीमर से कार्ड से रुपये निकालने आने वाले लोगों के कार्ड का डाटा चोरी कर लिया जाता है। कैमरे की मदद से पिन देख लेते हैं। इसके बाद क्लोन कार्ड तैयार करके रकम निकाली जाती है।
इसलिए एटीएम में रुपये निकालने जाने से पहले कई सावधानी भी बरतें। एटीएम केबिन में किसी और को नहीं आने दें। जिस जगह पर कार्ड लगाया जाता है, उसे छूकर चेक करें कि कोई और मशीन तो नहीं लगी है। पिन डालते समय हाथ से छिपा लें, जिससे अगर कैमरा लगा भी होगा तो पिन नहीं दिख सकेगा।