चेक क्लोनिंग केस में अटक गई है पुलिस की जांच
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दो करोड़ के चेक की क्लोनिंग के मामले में शहर में हल्ला तो खूब मचा है लेकिन इसकी जांच जरा भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पुलिस के सामने मजबूरी यह है कि अभी तक असली चेक ही सामने नहीं आया है। जिस एनआरआई ने चेक क्लोनिंग की शिकायत की, न तो उसने असली चेक पुलिस के सामने पेश किया है। और जिस बैंक मैनेजर पर घपले में शामिल होने का आरोप है, न ही वह चेक लेकर पुुलिस के सामने पहुंचा है। दूसरे आरोपी गुरुद्वारा माईथान की प्रबंध समिति के प्रधान दलप्रीत सिंह है। उनकी भूमिका की जांच भी इसलिए नहीं हो पा रही क्योंकि अभी तक चेक क्लोनिंग के साक्ष्य ही पुलिस के हाथ में नहीं आए हैं।
जर्मनी में रह रहे एनआरआई तैमूर को ई-मेल करके पुलिस ने बुलाया था। वह मूलरूप से पुणे के रहने वाले हैं। 15 जुलाई को आने की बात कही थी, लेकिन 19 तक नहीं आए। पुलिस ने रिमाइंडर मेल भेजा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसका जवाब नहीं दिया। अफसरों की समझ नहीं आ रहा कि जिस शख्स के खाते से दो करोड़ रुपये निकाल लिए गए हों, वह असली चेक लेकर क्यों नहीं आ रहा है।
एनआरआई का कहना है कि आईसीआईसीआई बैंक का असली चेक उनके पास है। इसकी क्लोनिंग करके खाते से रकम निकाली गई। इसकी एफआईआर में पंजाब एंड सिंध बैंक की घटिया स्थित शाखा के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने शाखा प्रबंधक से असली चेक मांगा। उन्हाेंने भी अभी तक नहीं दिया है। इंस्पेक्टर हरीपर्वत थाना का कहना है कि अगर वह बुधवार को चेक लेकर नहीं पहुंचते हैं तो पुलिस आगे की कार्रवाई शुरू कर देगी।