सौ करोड़ की तेल चोरी के मास्टरमाइंड मनोज गोयल की तलाश में रात-दिन एक करने के दावे तो पुलिस की ओर से किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही। उसे बचने का पूरा मौका दिया जा रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह अरेस्टिंग स्टे के प्रयास में है। उसकी घेराबंदी करने में भी ढिलाई बरती जा रही है।
पुलिस ने उसका पासपोर्ट निलंबित कराने के लिए रीजनल पासपोर्ट ऑफिस को रिपोर्ट नहीं भेजी है। पासपोर्ट के सहारे वह विदेश भाग सकता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह 15 दिन पहले ही दुबई से आया है। नोटबंदी के दौरान 1000-500 के सभी नोट बैंकों में जमा कराए गए थे। जाहिर है तेल चोरी का पैसा भी उसके खातों में होगा। पुलिस ने खातों से लेनदेन बंद कराने के लिए भी कार्रवाई नहीं की है। वह जितना चाहे, पैसा निकाल सकता है। उसके खातों का ट्रांजेक्शन रिकार्ड भी चेक नहीं किया गया है।
जमानतियों पर शिकंजा नहीं
मनोज पर पहली बार एफआईआर नहीं हुई है। वह पहले कई बार जेल जा चुका है। ऐसे मामलों में पुलिस आरोपी के जमानतियों पर शिकंजा कसती है। इस केस में अभी तक ऐसा नहीं किया गया।
पार्टनरों से पूछताछ नहीं
मनोज गोयल के जिन पेट्रोल पंपों पर चोरी का तेल बेचा गया, उनमें कई पार्टनर हैं। कई तो उसके रिश्तेदार हैं। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक इन साझीदारों से पूछताछ तक नहीं की है।
मनोज की कोठी में सजती थी मदिरा की महफिल
आगरा। मनोज गोयल की कोठी में पुलिस ने बृहस्पतिवार रात दबिश दी। यहां से विदेशी मदिरा की 23 बोतलें बरामद की गईं। उसके खिलाफ अब आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। इतनी सारी बोतलें मिलने से माना जा रहा है कि यहां मदिरा की महफिल सजती थी। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने पहले कभी कोई कार्रवाई नहीं की। यह कोठी नेहरू नगर पुलिस चौकी के ठीक बराबर में है। यह वही चौकी है जिसकी बिल्डिंग के निर्माण में मनोज से मोटा चंदा लिया गया था। पुलिस को यह भी मालूम था कि मनोज यहां मिलने वाला नहीं है। यहां पहले भी दबिश हो चुकी थी। पहली बार दबिश के दौरान पुलिस ने शराब की बोतलों पर ध्यान नहीं दिया। तब इनकी बरामदगी नहीं हुई थी।
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- अफसरों से उसके रिश्तों की पूरी कहानी से पर्दा उठ सकता है।
- थानों और चौकियों में लगे उसके पैसे की पूरी जानकारी सामने आ सकती है।
- नोटबंदी के दौरान पंपों पर नोट बदले जाने का खेल खुल सकता है।
- तेल चोरी में रिफाइनरी के अधिकारियों की मिलीभगत का पता चल सकता है।
- उसके इशारों पर काम करने वाले पुलिसवालों के चेहरों से नकाब उठ सकता है।