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कैदियों की रिहाई का आदेश जारी नहीं कर सकती सरकार

Wed, 07 Sep 2016 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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कारागार राज्यमंत्री ने हड़ताली कैदियों को सरकार की मजबूरी बताई - फोटो : demo pics
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रिहाई की मांग लेकर आठ दिन से भूख हड़ताल कर रहे 350 बंदियों को मनाने के लिए मंगलवार सुबह 11 बजे प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी सेंट्रल जेल पहुंचे। उन्होंने दो घंटे तक समझाया कि कानूनी मजबूरी के चलते रिहाई के लिए शासनादेश जारी नहीं किया जा सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 14 साल की सजा काट चुके कैदी रिहा नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव दीपक सिंघल तक ऐसे बंदियों की रिहाई के लिए रास्ता निकालने में लगे हैं। जल्द ही कोई न कोई हल जरूर निकाल लिया जाएगा। उनके इस आश्वासन पर 150 बंदियों ने हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन 200 अभी भी जिद पर अड़े हैं। इनमें चार का जेल के अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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सेंट्रल जेल में 2050 बंदी हैं। इनमें 350 ही ऐसे हैं जो उम्रकैद की सजा में 14 साल या इससे अधिक जेल में काट चुके हैं। अलीगढ़ के राजा बाबू को तो 35 साल हो गए हैं। इन सभी कैदियों ने आठ दिन से भूख हड़ताल कर रखी है। इनकी मांग है कि उनकी एक साथ रिहाई के लिए शासनादेश जारी किया जाए। जब जेल और प्रशासन के अधिकारी उन्हें नहीं मना पाए तो मंगलवार को कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी आए।

उन्होंने बताया कि कैदियों की एक साथ बड़ी संख्या में रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। सरकार के हाथ बंधे हैं। लेकिन 14 साल या इससे अधिक सजा काट चुके कैदियों को रिहा कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जेल प्रशासन से रिपोर्ट तैयार कराई गई है। जल्द ही मुख्य सचिव दीपक सिंघल सभी डीएम के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात करेंगे। मुख्य सचिव के साथ एडीजी जेल जीएल मीणा भी मौजूद रहेंगे।
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उधर, जेल अधिकारियों ने बताया कि मंत्री के जाने के बाद सर्किल नंबर चार के लगभग 150 कैदियों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी। इस सर्किल में 175 कैदी हैं। सर्किल तीन में भी 175 कैदी हैं। इन्होंने रिहाई होने तक भूख हड़ताल पर रहने की जिद पकड़ी है।

कैदियों को आसानी से मिलेंगे पैरोल
कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी ने आश्वासन दिया है कि कैदियों को परिवार में कोई जरूरी काम होने पर पैरोल अब आसानी से मिलेंगे। इसके लिए सभी डीएम को निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके अलावा रिहाई के लिए पुलिस रिपोर्ट भी निष्पक्षता से तैयार कराई जाएगी। आरोप लगते हैं कि पुलिस बगैर जांच के नेगेटिव रिपोर्ट दे देती है।
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