शहर की सबसे सनसनीखेज वारदात में से एक ग्रोवर दंपति हत्याकांड आगरा पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी साबित हो रहा है। डीजीपी जावीद अहमद इस मर्डर मिस्ट्री का खुलासा न होने के चलते पुलिस अफसरों की दो बार क्लास लगा चुके हैं। इसके बावजूद कातिलों तक पहुंचना तो बहुत दूर पुलिस अभी तक सुराग तक नहीं लगा पाई है। कत्ल का मकसद तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। थाना पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच तक में खुद को क्राइम डिटेक्शन का एक्सपर्ट बताने वाले इस एग्जाम में फेल हैं।
आईजी और डीआईजी जिन दो अफसरों से जांच की प्रगति रिपोर्ट लेते हैं, वह दोनों ही आईपीएस हैं। एएसपी अनुराग वत्स और एसपी सिटी सुशील घुले। वैसे आईजी और डीआईजी भी सिर खपा चुके हैं। इनके अलावा डीजीपी जावीद अहमद अनसुलझे केस की फाइल देखकर एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह को खुलासे के लिए निर्देश दे चुके हैं। जिस हरीपर्वत थाना क्षेत्र में यह वारदात हुई, उसके तीन प्रभारी बदल चुके हैं। लेकिन 15 नवंबर 2015 से अब तक की गई तमाम कोशिशों का नतीजा शून्य पर अटका है।
बता दें, खंदारी में लेदर ट्रेडिंग कारोबारी अवनीश ग्रोवर और उनकी पत्नी ऊषा ग्रोवर की उनके ही घर में बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घर का सारा सामान बिखरा था लेकिन पुलिस इसी जिद पर अड़ी रही कि मामला लूट का नहीं है, वारदात को लूट का रंग दिया गया है। आज तक यही पता नहीं चला कि लूट का रंग किसने और क्यों दिया। जिस तरह अलमारियां खोली गई थीं, उससे पुलिस ने अंदाजा लगाया था कि कातिल कोई न कोई करीबी हो सकता है। लेकिन यह थ्योरी भी बेदम साबित हो गई। इसके अलावा कोई लाइन आज तक नहीं मिली।
पता नहीं क्या कर रही पुलिस
कत्ल किए गए ग्रोवर दंपति के पुत्र अवनीश ग्रोवर का कहना है कि पता नहीं पुलिस क्या कर रही है। उन्होंने जिन लोगों पर शक जाहिर किया था, उनसे ठीक से पूछताछ तक नहीं की। जो फिंगर प्रिंट लिए थे, उनकी आज तक रिपोर्ट नहीं आई।
मर्डर मिस्ट्री
- जिस टेप से दंपति को बांधा गया, वह कुछ ही फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होती है, इससे पुलिस सुराग नहीं लगा पाई।
- मौके से मिले फिंगर प्रिंट से संदिग्धों के फिंगर प्रिंट मिलान के लिए लैब भेजे गए, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई।
- पुलिस खुद नाकाम है, लेकिन जांच सीबीआई या अन्य किसी जांच एजेंसी को देने की सिफारिश नहीं कर रही।
- अगर वारदात का मकसद लूट नहीं तो फिर क्या था, इसका जवाब नहीं तलाश रही पुलिस।