साइबर अपराधियों ने अग्निशमन विभाग से सेवानिवृत्त हुए उप निरीक्षक श्रीकिशन के खाते से 26 लाख रुपये निकाल लिए। उन्हें ट्रेजरी अफसर बनकर कॉल किया था। खाते की जानकारी लेकर और ओटीपी पूछकर नेट बैंकिंग से रकम निकाल ली गई। रेंज साइबर सेल सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने वाले गिरोह के बारे में पड़ताल कर रही थी। तब यह मामला सामने आया है।
श्रीकिशन आगरा अग्निशमन विभाग में तैनात थे। हाल ही में वह सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका घर फिरोजाबाद के सुहाग नगर में है। आगरा रेंज साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक शैलेष सिंह ने बताया कि श्रीकिशन के खाते में फंड सहित अन्य देय की राशि आई थी। साइबर अपराधी ने खुद को ट्रेजरी अफसर बताकर उनसे संपर्क किया था।
दो दिन में निकाली रकम
पेंशन जल्दी दिलाने का लालच देकर खाते की जानकारी ली गई। इसके बाद नेट बैंकिंग के जरिए रकम निकाली गई। इसके लिए ओटीपी भी पूछा गया। 30 नवंबर और एक दिसंबर को कई बार में 26 लाख रुपये निकाल लिए गए। श्रीकिशन ने बताया कि उन्होंने मोबाइल में बैंक का संदेश तब देखा, जब पूरी रकम निकल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने फिरोजाबाद साइबर सेल में शिकायत की। वहां से जांच यहां आई है।
झारखंड के गिरोह ने 40 सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को कॉल की थी
निरीक्षक शैलेष सिंह ने बताया कि इससे पहले अलीगढ़ से सेवानिवृत्त एचसीपी नाहर सिंह के खाते से 96 हजार रुपये निकाले गए थे। यह गिरोह सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को शिकार बना रहा है। जिस नंबर से कॉल किया गया, उसकी लोकेशन झारखंड की आई।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने 40 से अधिक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को फोन किया। सभी से कहा था कि वह ट्रेजरी अफसर बोल रहे हैं। खाते की जानकारी देने पर ही पेंशन लाभ मिल सकेगा। इसके लिए ओटीपी पूछ रहे हैं। हालांकि उनके झांसे में चार ही आए। दो सेवानिवृत्त कर्मचारी सिद्धार्थ नगर और सहारनपुर के हैं। 36 ने जानकारी नहीं दी।
ई वालेट से ट्रांसफर कर रहे रकम
साइबर सेल की जांच में पता चला है कि नाहर सिंह से 96 हजार रुपये एक ई वालेट में ट्रांसफर किए गए थे। वहां से झारखंड की एक बैंक में ट्रांसफर हुए। झारखंड की बैंक से पश्चिम बंगाल की बैंक में भेज दिए गए। यहां से पटियाला रकम ट्रांसफर की गई। बाद में अहमदाबाद की बैंक भेजे गए। इस बैंक से झारखंड की बैंक के एक खाते में रकम भेज दी गई। इसके बाद निकाल ली गई। साइबर सेल के शैलेष सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी एक राज्य से दूसरे राज्य की बैंक के खाते में रकम ट्रांसफर करते हैं। एक-एक करके रकम को एटीएम और अन्य माध्यम से निकाला जाता है।
कहां से मिल रही सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के नंबरों की जानकारी
पुलिस विभाग के कर्मचारियों को फंड और ग्रेच्युटी का पैसा सेवानिवृत्ति के दिन ही मिल जाता है। इस कारण उनके खातों में काफी रकम होती है। साइबर अपराधी ट्रेजरी अधिकारी बनकर फोन करके उनका नाम लेते हैं, यह भी बताते हैं कि आप सेवानिवृत्त हुए हो।
इस कारण कई लोग विश्वास कर लेते हैं। रेंज साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि कर्मचारी अक्तूबर और नवंबर में सेवानिवृत्त हुए हैं। यह बात साइबर अपराधियों को कैसे पता है, इसकी भी जांच की जा रही है।