पूर्व में भी हो चुका है विवाद
बीते वर्ष भी जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी प्रशांत और वरिष्ठ सहायक हंबीर सिंह में विवाद हो चुका है। तब बाबू की ओर से अधिकारी पर मारपीट करने और अभद्रता का आरोप लगाया था। मामले में तहरीर भी दी थी, लेकिन तब रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने खुद मामले की जांच कर अपनी गोपनीय रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी थी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इंस्पेक्टर कोतवाली विजय गौतम ने कहा कि जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है। मौके से हिरासत में लिए गए आरोपियों को शनिवार को जेल भेजा गया है।
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