विहिप नेता अरुण माहौर की हत्या के विरोध में दलित समाज के कुछ लोगों ने ‘दलित गर्जना’ का गठन कर सपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार को चेतावनी दी है कि जब अरुण माहौर के परिजनों को ‘दादरी’ के समान मुआवजा नहीं मिलता है, तब तक वे आंदोलन करेंगे। साथ ही अरुण माहौर की हत्या पर सपा और बसपा की चुप्पी पर सवाल भी उठाए हैं। कहा है कि दलित बस्तियों में शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी। जिनमें गोकशी रोकने का संकल्प दिलाया जाएगा।
मदिया कटरा स्थित होटल वैभव पैलेस में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान संस्था ‘दलित गर्जना’ के संयोजक अशोक कोटिया ने अरुण के परिजनों के लिए ‘दादरी प्रकरण’ की तरह ही 45 लाख रुपये, दो मकान और परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी की मांग रखी। साथ ही कहा कि रोहित वेमुला को ‘दलित’ बताकर हैदराबाद में घड़ियाली आंसू बहाने वाले राजनीति कर रहे हैं। वे अब तक अरुण के परिजनों से मिलने नहीं आए। उन्होंने कहा कि रोहित ने तो आत्महत्या की थी, जबकि दलित अरुण की हत्या की गई है, इसके बाद भी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा सुप्रीमो मायावती, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मौन हैं। ‘दलित गर्जना’ ने अरुण के हत्यारों पर रासुका लगाने और इस मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने, इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने इस मामले में पुलिस और अपराधियों की सांठगांठ की भी जांच कराने की बात कही है। साथ ही मीरा हुसैनी चौराहा का नाम बदलकर शहीद अरुण सिंह माहौर चौक रखने और किसी सार्वजनिक स्थान पर उनकी प्रतिमा लगाए जाने की मांग की है। इस दौरान ओमप्रकाश चलनी वाले, शिव कुमार प्रमुख, शिव कुमार राजौरा, बनवारी पहलवान, रवि माहौर, कैलाश माहौर आदि मौजूद थे।
दलित बस्तियों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग
‘दलित गर्जना’ ने संवेदनशील दलित बस्तियों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी की है। कहा कि इसके अलावा अरुण माहौर के परिजनों और मुकदमे के गवाहों को भी सुरक्षा प्रदान की जाए। वहीं, नेताओं ने इस मामले में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं, उन्हें वापस लेने की भी मांग की है।
पीएमओ तक मची हलचल, कठेरिया से जवाब तलब
भड़काऊ भाषण मामले पर गुरुवार को गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भी हरकत में आ गए। डा. रामशंकर कठेरिया ने अपनी सफाई शोकसभा की सीडी पेश की। सीडी में उनके भाषण को खुद देखने-सुनने के बाद ही राजनाथ सिंह ने उन्हें क्लीन चिट दी। भाजपा हाईकमान ने भी सीडी का बारीकी से अध्ययन किया है।
बता दें, इस मामले में 29 फरवरी को भी संसद में खूब हंगामा भी हुआ था। विपक्षी दलों ने कठेरिया को बर्खास्त करने की मांग कर डाली। सूत्रों के मुताबिक इस हंगामे से गंभीर हुए पीएमओ और गृहमंत्री ने कठेरिया से जवाब तलब किया। इससे पसीना-पसीना हुए कठेरिया के सहयोगियों ने आनन-फानन में स्थानीय केबल टीवी आपरेटरों से पूरे भाषण की रिकॉर्डिंग एकत्रित की। इसे सीडी के आठ सेट में कठेरिया के पास दिल्ली पहुंचाया गया। मुख्य रूप से पीएमओ, गृहमंत्री और भाजपा कार्यालय को एक-एक सीडी भेजी गई। हालांकि यह सीडी 29 फरवरी को ही इन सभी को उपलब्ध करा दी गई थी। इसके बाद ही राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कठेरिया को निर्दोष बताया।
इस कारण हो रहा बवाल
विहिप नेता अरुण माहौर की हत्या के बाद 28 फरवरी को जयपुर हाउस स्थित रामलीला पार्क में शोकसभा आयोजित की थी। इसमें भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस के तमाम नेताओं के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया, सांसद चौधरी बाबूलाल, विहिप के केंद्रीय संयुक्त मंत्री डा. सुरेंद्र जैन और साध्वी प्राची ने भाषण दिए थे। इन पर सांप्रदायिकता भड़काने वाला भाषण देने का आरोप लगा।
कठेरिया के विरोधियों को झटका
भड़काऊ भाषण मामले में विपक्षियों के निशाने पर आए कठेरिया को भाजपा में सक्रिय उनके विरोधी खेमा भी अंदरखाने इस मामले को तूल देने में जुटा था। इससे कठेरिया की मुश्किलें बढ़ रही थी। राजनाथ सिंह की क्लीन चिट ने उन्हें कम से कम पार्टी में तो मुश्किल से उबार ही दिया है। विरोधियों को झटका भी लगा।