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जमीनी हकीकत: गोशालाएं पड़ गईं कम, सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश, मुख्यमंत्री ने दिए हैं संरक्षण के आदेश

Wed, 24 Nov 2021 10:02 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

जिन नंदियों का वजन 400 से 500 किलो होना चाहिए उनकी हड्डियों का ढांचा चमक रहा हैं। नंदीशाला में भूसा गोदाम के पीछे बीमार नंदी जमीन पर पड़े हुए हैं।
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सड़क पर खुले घूम रहे गोवंश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सड़कों पर छुट्टा घूम रहे गोवंश के सरंक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को व्यवस्थाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। आदेश को 48 घंटे बीत गए। जमीनी हकीकत नहीं बदली। जिले में 7579 निराश्रित गोवंश सड़कों पर घूम रहा है। इनके सरंक्षण के लिए गोशालाएं कम पड़ गई हैं। 2019 में आई 20वीं पशुगणना रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 16916 निराश्रित गोवंश हैं। छह सरकारी गो सरंक्षण केंद्र, चार कांजी हाउस, तीन पंजीकृत व 16 अपंजीकृत गोशालाओं में कुल 9337 गोवंश रह रहा है।

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सर्दी शुरू हो गई है। एक तरफ निराश्रित गोवंश सड़कों पर छुट्टा घूम रहा है तो दूसरी तरफ गो सरंक्षण केंद्रों में गोवंश की स्थिति दयनीय है। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने बाईंपुर स्थित नंदीशाला व वृंदावन गोशाला की पड़ताल की, तो यहां गोवंश की हालत देखकर चौंक गई। बाईंपुर नंदीशाला में 1089 नंदी हैं। पर्याप्त खुराक नहीं मिलने से जिन नंदियों का वजन 400 से 500 किलो होना चाहिए उनकी हड्डियों का ढांचा चमक रहा हैं। नंदीशाला में भूसा गोदाम के पीछे बीमार नंदी जमीन पर पड़े हुए हैं। नंदीशाला से आगे ही वृंदावन गोशाला है। यहां 380 गोवंश हैं। एक बीमार गाय चारा खाने की हॉद में उल्टी पड़ी है। जिसे आश्रय स्थल स्टाफ ने पूंछ पकड़ उठाया तो फट से गाय खड़ी हो गई।

वर्जित है लोगों का प्रवेश
जिले में छह सरकारी गो सरंक्षण केंद्र हैं। जिनमें करीब 3425 गोवंश को रखा गया है। अमर उजाला टीम जब नंदीशाला पहुंची तो वहां केयर टेकर ने बताया कि अंदर प्रवेश वर्जित है। वृंदावन गोशाला में भी यही जवाब मिला। फिर टीम ने खूफिया कैमरे की मदद से गोशाला के अंदर का नजारा कैद किया। 

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पंचायतों में बनेंगे केंद्र
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीएस तोमर से जब पूछा गया कि 7579 निराश्रित गोवंश को कहां रखा जाए तो उन्होंने कहा इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर जमीन की तलाश हो रही है। प्रत्येक न्याय पंचायत अपने क्षेत्र के निराश्रित गोवंश का सरंक्षण करेगी। उन्होंने बताया कि गोवंश की पकड़ने के लिए संसाधन नहीं हैं। नगर निगम जो गोवंश पकड़ कर लाता है उसे रखवाने की व्यवस्था कराई जाती है।

दो नई गोशाला का प्रस्ताव
पिनाहट व किरावली में दो नई गोशाला निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने करीब 2.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। दोनो गोशालाओं में 500-500 पशुओं की क्षमता होगी। 

4700 पशुओं के लिए खुराक
निराश्रित गोवंश के लिए प्रतिदिन 30 रुपये की खुराक तय है। छह सरकारी गोशाला व एक सहभागिता के तहत चल रही गोशाला में करीब 4700 पशुओं के लिए प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से 1.41 लाख रुपये व्यय सरकार करती है। बाकी पशुओं की खुराक का इंतजाम नहीं है। 
 
बनाई गई हैं टीमें
निराश्रित गोवंश को पकड़ने व उन्हें गोशाला में रखवाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। टीमें बनाई हैं। सर्दी से बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं। इलाज की कमी से किसी गोवंश की मृत्यु होती है तो उसके लिए पशु चिकित्सक स्वयं जिम्मेदार होंगे। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी 
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गो सरंक्षण केंद्रों की स्थिति
  केंद्र                      -     सरंक्षित गोवंश 
- शांति नंदिशाला, बांईपुर -      1089 
- कन्हैया गोशाला, बाईंपुर -      178
- वृंदावन गोशाला, बाईंपुर -      380
- गोसरंक्षण केंद्र, कौलाराकलां - 490
- गोसरंक्षण केंद्र, चीत खेरागढ़ - 397
- कान्हा गोशाला, नरायच-       890
- चार कांजी हाउस       -      139
- तीन पंजीकृत गोशालाएं-       1651
- 13 अपंजीकृत गोशालाएं-      4123
(नोट- आंकड़े जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार)

गो सेवकों की पीड़ा  
- गोवंश के लिए करोड़ों रुपये का फंड आ रहा है। गाय भूखी-प्यासी रहती हैं। एनजीओ को ठेके दे दिए हैं। कोई संगठन आवाज उठाए तो अफसर उन पर उल्टा दबाब बनाते हैं।  करन गर्ग, गो सेवक

- गोशाला के अंदर क्या होता है किसी को नहीं पता चलता। रोज गोवंश मर रहा है। बीमार पशुओं को इलाज नहीं मिलता। सर्दी में बीमार गोवंश की मृत्यु हो जाती है।  जितेंद्र रावत, गो सेवक

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