एक समय था जब आयरन लेडी के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी को समय पूर्व चुनाव कराने का इरादा छोड़ना पड़ा था। दरअसल सेना के लिए खरीदे गए वनस्पति तेल में गाय और सुअर की चर्बी मिली होने की चर्चा से चुनाव में कांग्रेस की हार की आशंका से वे डर गई थीं। उस समय वनस्पति तेल में मिलावट से सेना और जनता के बीच रोष फैल गया था। 1984 में आम चुनाव से पहले इस तरह की खबरों से सरकार को राज्यसभा में सफाई देनी पड़ी थी।
अमर उजाला के 1 दिसंबर 1983 के अंक में प्रकाशित लेख में कुलदीप नैयर ने बताया था कि समय से पूर्व आम चुनाव न कराने का एक कारण वनस्पति तेल में चर्बी मिलाए जाने को लेकर फैला रोष है। इस तेल का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोग यह महसूस करते हैं कि उनसे अनजाने में पाप हो गया है। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे देश में हिंसा भी हो सकती है। चर्बी होने की चर्चा के कारण ग्रामीण इलाकों में लोगों ने वनस्पति तेल का इस्तेमाल बंद कर दिया है। लोगों में सरकार के प्रति रोष है कि उसने व्यापारियों को गाय और सुअर की चर्बी से वनस्पति तेल तैयार करने की अनुमति दी।
कुलदीप नैयर के अनुसार इंदिरा गांधी का भी आंकलन यह था कि चर्बी को लेकर प्रचार उनकी पार्टी के लिए उतना ही नुकसानदायक हो सकता है, जितना 1977 में परिवार नियोजन से हुआ था। गुप्तचर एजेंसी ने भी कहा कि चर्बी मामले को लेकर जनता में कांग्रेस के प्रति नाराजगी है। चुनाव में इसका नुकसान उन्हें भुगतना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में राजनारायण चर्बी मामले में जनता के रोष को उभारने की कोशिश कर रहे थे। कांग्रेस के भी कुछ लोग राजनारायण के साथ थे। गुप्तचर रिपोर्ट में कहा गया था कि चर्बी मामले को लेकर चलाए जा रहे विपक्ष के अभियान का मुख्य निशाना तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और इंदिरा गांधी के विशेष सहायक आरके धवन थे।