अस्पताल के बाहर स्वास्थ्यकर्मी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
हैलो... मेरी मां का ऑक्सीजन स्तर कम हो गया है। हालत खराब है, मुझे एक एडमिट करने के लिए बेड चाहिए। फोन पर जवाब मिला, बेड तो मिल जाएगा, लेकिन मरीज के साथ पांच सिलिंडर लेकर आने पड़ेंगे, तभी भर्ती करेंगे। ये हाल है शहर में कोविड अस्पतालों का। जहां ऑक्सीजन नहीं मिलने से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा।
नगला पदी निवासी कमल कुमार की 45 वर्षीय मां मिथलेश देवी कोरोना पॉजिटिव हैं। सोमवार दोपहर उनका ऑक्सीजन लेवल 70 रह गया। कमल ने बताया कि मैंने 41 कोविड अस्पतालों की सूची से बेड पता करने के लिए फोन लगाए। पहले पुष्पांजलि, प्रभा, पारस ने मना कर दिया। फिर कमला नगर स्थित रश्मि मेडिकेयर सेंटर फोन लगाया। तो उन्होंने कहा, बेड खाली है, लेकिन मरीज भर्ती करने के लिए साथ में पांच ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आओ।
अमर उजाला ने बेड व मरीज भर्ती पड़ताल के लिए रविवार को सीएमओ द्वारा जारी 41 कोविड अस्पतालों की फोन से पड़ताल की तो हैरान करने वाली बात सामने आई। 41 में 31 अस्पतालों के फोन स्विच्ड ऑफ मिले या घंटों तक व्यस्त रहे। पारस हॉस्पिटल में फोन उठा, लेकिन ऑक्सीजन नहीं होने की बात कही। शांति देवी हॉस्पिटल सिकंदरा, खुशी हॉस्पिटल कालिंदी विहार, चाहर हॉस्पिटल अर्जुन नगर समेत 31 अस्पतालों के फोन नहीं उठे।
मदद में नाकाम हो गया कंट्रोल रूम
एक तरफ जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन में विफल हो रहा है, दूसरी तरफ चार दिन पहले स्मार्ट सिटी सेंटर में बना कोविड कंट्रोल रूम लोगों की मदद में नाकाम साबित हो रहा है। सोमवार को कंट्रोल रूम पर चार बार अमर उजाला ने फोन लगाया, लेकिन फोन नहीं उठा। ऐसे में मरीजों के तीमारदार बेड, ऑक्सीजन, दवाइयों व जांचों के लिए परेशान रहे। कंट्रोल रूम से उन्हें मदद नहीं मिल सकी।
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