मथुरा में गुरुवार को पॉक्सो कोर्ट के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने सीओ छाता चंद्रधर गौड़ को छह महीने की सजा सुनाई और एक हजार रुपये का जुर्माना किया है। सीओ तत्कालीन कोतवाल को बचाने और कोर्ट में नाबालिग के बयान दर्ज न कराने में फंसे हैं। कोर्ट ने यूपी के गृह सचिव को पत्र लिखकर सीओ को कार्यमुक्त करने को कहा है। साथ ही एसएसपी को नए क्षेत्राधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं।
मामला 7 जुलाई 2018 का है। छाता कोतवाली क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ छेड़छाड़ हुई थी। परिजन मामला दर्ज कराने कोतवाली पहुंचे लेकिन मुकदमा पॉक्सो एक्ट में दर्ज नहीं किया गया। इस पर वादी ने पॉक्सो कोर्ट में प्रकीर्ण वाद दायर किया। मामला कोर्ट में दर्ज होने के बाद पॉक्सो कोर्ट के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने बुधवार को सीओ छाता चंद्रधर गौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। गुरुवार को कोर्ट ने सीओ छाता को छह महीने की सजा सुनाई और एक हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है।
एडीजीसी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने सजा के साथ ही यूपी के गृह सचिव को पत्र लिखकर सीओ को तत्काल कार्यमुक्त करने को कहा है। इसके अलावा हाईकोर्ट के रूल के आधार पर गैर जमानती वारंट जारी करने और एसएसपी को वादी की जांच अन्य क्षेत्राधिकारी से कराते हुए सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि आदेश मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।