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आगरा में कोरोना का कहर: 24 घंटे में पांच, सात दिन में 25 मरीजों की मौत

Fri, 23 Apr 2021 09:24 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

ताजनगरी में एक बार फिर हालात बिगड़ चुके हैं, न मौत का सिलसिला थम रहा है और न ही नए मरीजों का आंकड़ा। 
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आगरा में कोरोना: एसएन मेडिकल कॉलेज का आइसोलेशन वार्ड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में कोरोना वायरस की दूसरी लहर संक्रमितों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। पहली बार गुरुवार को 24 घंटे में पांच मरीजों की मौत हो गई। पिछले सात दिन में 25 मरीज दम तोड़ चुके हैं। इससे कुल मृतकों की संख्या 208 हो गई है। 546 नए मरीज मिलने से एक्टिव केस भी 3746 हो गए हैं।

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जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि गुरुवार को पांच संक्रमितों ने दम तोड़ा है। जिनमें कमला नगर निवासी 78 वर्षीय हृदय रोगी, नामनेर निवासी 57 वर्षीय हृदय रोगी, केदार नगर निवासी 73 वर्षीय सांस रोगी, बेलनगंज निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति और सिकंदरा निवासी 74 वर्षीय मनोरोगी की उपचार के दौरान मौत हो गई। कोरोना से कुल 208 मरीजों की मौत हो चुकी है। 15 अप्रैल तक मृतक संख्या 183 थी, जो बृहस्पतिवार को 208 हो गई है। पिछले सात दिनों में 25 मौतें हो चुकी हैं।

एक्टिव केस बढ़ने से चरमराए इंतजाम
डीएम के मुताबिक 456 नए मरीज मिलने से एक्टिव केस 3746 हो गए हैं। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 15602 पहुंच गया है। जिनमें 11648 मरीज ठीक हो चुके हैं। जिले में बृहस्पतिवार तक 7.03 लाख लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है। संक्रमितों के स्वस्थ होने की दर 24 घंटे में 76 फीसदी से घटकर 74.66 फीसदी रह गई है। लगातार एक्टिव केस बढ़ने ने इलाज के इंतजाम भी चरमरा रहे हैं। ऐसे में मरीजों की मौतों से हड़कंप मच रहा है।

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40 फीसदी संक्रमित 30 से 50 आयु वाले
कोरोना संक्रमण की चपेट में बड़ी संख्या में युवा आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को 546 मरीजों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। इसमें करीब 40 फीसदी संक्रमितों की उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच है। युवाओं के साथ 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो रही है। गुरुवार को पांच वर्ष और आठ वर्ष के बच्चों की कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आई । 

आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार 
कोरोना संक्रमण की जांच कराने वाले लोगों को अब रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। चार से पांच दिनों में भी आरटीपीसीआर की रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। लक्षण होने के बाद भी उन्हें हॉस्पिटलों में भर्ती नहीं किया जा रहा है। घर पर रहकर ही इलाज करने के लिए मजबूर हैं।
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