उनके परिजनों का यह कहना है कि पहले तो वो इटली नहीं गए। दूसरा, महिला बंगलूरू से आगरा नहीं गई। वे 6 मार्च को मुंबई में उतरे, उसके बाद 8 मार्च को बंगलूरू के लिए गए और वहां से आगरा गए जबकि उनके पति बंगलूरू में रहे।
परिजनों ने बताया कि हवाई अड्डे पर नियमित स्क्रीनिंग दोनों को पूरी तरह से सामान्य पाया। जब तक महिला आगरा पहुंची, तब तक उनके पति भी पूरी तरह से ठीक थे। पति को पहली बार 9 मार्च को बुखार लगा, जिसके बाद 10 मार्च को उन्होंने परिक्षण करवाया। 12 मार्च को जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई, जिसके बाद उसी दिन आगरा में अधिकारियों को सूचित किया गया।
जिसके बाद महिला और उसके परिवार ने सहयोग किया और एक स्थानीय अस्पताल में जांच कराई। उन्हें अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रहने के लिए कहा गया, जो काफी गंदा था। परिवार ने बेहतर जगह के लिए अनुरोध किया और अधिकारियों ने उन्हें इस शर्त के साथ घर जाने की अनुमति दी कि फेस मास्क पहनना अनिवार्य है।
अगले दिन अधिकारियों ने महिला और उनके परिवार को वापस आने के लिए कहां और उनके घर का दौरा किया। पूरा मामला यह था कि परिवार ने बेहतर आइसोलेशन वार्ड के लिए अनुरोध किया इस वजह से विवाद हुआ। जहां महिला के परिजनों ने बाकी मीडिया रिपोर्ट को ठुकराया वहीं अमर उजाला की खबर को अपनी बात का आधार बनाया है।
युवती की शादी एक माह पहले हुई है। शादी के बाद मायके में पहली होली के लिए युवती आगरा आ गई थी। उसके आने के बाद पति के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना आई।
इस पर स्वास्थ्य विभाग ने 12 मार्च को उसका सैंपल लेकर अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की लैब में भेजा, इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि इसके आधार पर प्रशासन ने कोरोना की पुष्टि नहीं की बल्कि एक और सैंपल किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज भिजवा दिया।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि युवती में कोरोना वायरस (Covid 19) की पुष्टि हो गई है। उधर, कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज की हालत स्थिर बनी हुई है। जिलाधिकारी ने रविवार को उसकी सेहत की जानकारी ली।