कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
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संक्रमण में डायरिया हो सकता है घातक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने बताया कि अगर बच्चे संक्रमित होते हैं तो उनमें कोविड के लक्षण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार से शुरू होंगे। ऐसे में अगर उन्हें डायरिया होता है तो स्थिति चिंताजनक होगी। निमोनिया भी बढ़ सकता है। निमोनिया में बच्चों के लिए भी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी।
शहर में बच्चों का अस्पताल नहीं
बच्चों के लिए शहर में कोई डेडिकेटेड अस्पताल नहीं हैं। आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी यादव ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका इसलिए अधिक है क्योकि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन हो रहा है। बच्चों के लिए कोविड से बचाव को कोई टीका नहीं बना।
दिल्ली से मंगानी पड़ती है एंबुलेंस
बच्चों के लिए वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस शहर में नहीं है। नाक या मुंह से नली डालकर उन्हें शिफ्ट किया जाता है। बच्चों की आईसीयू एंबुलेंस दिल्ली से मंगानी पड़ती है। इसका किराया 15 से 20 हजार रुपये है। - रवि सिसौदिया, अध्यक्ष, यूपी एंबुलेंस एसोसिएशन
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह
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सरकार को भेजी है मांग
20 पीआईसीयू, 30 एनआईसीयू सहित 100 बेड का वार्ड बना रहे हैं। बच्चों की दवा, उपकरण और मानव संसाधन के लिए सरकार को मांग भेजी हैं। प्रारूप तैयार हो गया है। बच्चों के उपचार के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं।
- डॉ. राजेश्वर दयाल, विभागाध्यक्ष, बाल रोग, एसएन मेडिकल कॉलेज
एक महीने में तैयार होगा वार्ड
- एसएन में 100 व जिला अस्पताल में 20 बेड का बच्चा वार्ड एक महीने में तैयार हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी की टीम ने काम शुरू कर दिया है। तीसरी लहर में बच्चों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं होंगी।
- प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी, आगरा
ये हैं आंकड़े
- 1.28 लाख बच्चे हैं 12 से 24 महीने के
- 200 बाल रोग विशेषज्ञ हैं शहर में पंजीकृत
- 20 पीआईसीयू में वेंटीलेटर बेड हैं जिले में
- 14 महीने से बच्चों की सरकारी ओपीडी बंद है।
- 08 बच्चे भर्ती हुए एसएन में दूसरी लहर में।
- 30 बच्चे भर्ती हुए थे पिछले साल पहली लहर में।
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