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कोरोना से हुई मौतों पर एसएन कॉलेज में हुआ शोध, चौंकाने वाली जानकारी के बाद इन दवाओं से उपचार

Sat, 20 Jun 2020 12:31 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने से जा रही है जान 
  • स्टेरॉइड्स, एनोक्सापारिन दवा से उपचार
  • शुरुआती पांच मामलों में यह जीवन रक्षक साबित
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एसएन का कोविड केयर कक्ष (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना वायरस से हो रहीं मौतों का राज हैरान करने वाला है। मरने से पहले शरीर में खून के थक्के जम रहे हैं। फेफड़े सफेद हो जाते हैं। फिर ऑक्सीजन का स्तर घटता है और सांस बंद हो जाती हैं। यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज में मृतकों पर हुए अध्ययन में सामने आई है। ऐसे में नई गाइड लाइन के अनुसार स्टेरॉइड्स और एनोक्सापारिन दवा का उपचार में प्रयोग शुरू किया गया है। शुरुआती पांच मामलों में यह जीवन रक्षक साबित हुई हैं।
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अनलॉक-1 में बीते 17 दिनों में 27 मरीजों की मौत हुई। एसएन प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार, शोध में सामने आया है कि पहले से बीमार मरीजों की मृत्यु दर बढ़ने की वजह उनके शरीर में हो रही ऑक्सीजन की कमी है। क्रिटिकल केस में शरीर में खून में थक्के जमने लगते हैं।

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खून गाढ़ा होने लगता है। वायरस के फेफड़ों को गिरफ्त में लेने से ये सफेद होकर चोक हो जाते हैं। शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। मरीज की सांस टूट जाती है। 14 मई को आई ट्रीटमेंट की नई गाइडलाइन से उपचार में मदद मिली है। 
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पांच मरीजों की जान बची
फेफड़े चोक होने की वजह साइटोकाइन बायोलॉजिकल केमिकल है। आईसीयू विशेषज्ञ डॉ. बीके सिंह ने बताया कि साइटोकाइन का स्तर बढ़ने से वायरस पहले से अधिक तीव्र हो जाता है। स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से इसकी रफ्तार को नियंत्रित किया जाता है।

गंभीर मरीजों में खून पतला करने के लिए एनोक्सापारिन दवा शुरू की है। वायरस का प्रभाव फेफड़ों पर कम करने के लिए स्टेरॉइड्स भी दी जा रही हैं। पांच मरीजों पर प्रयोग में ये दवाएं जीवन रक्षक साबित हुई है। उम्मीद है कि इससे मृत्यु दर में कमी आएगी।

नई दवाओं से उपचार शुरू
ट्रीटमेंट की नई गाइडलाइन आ गई है। गंभीर मरीजों में नई दवाओं के परिणाम सकारात्मक आए हैं। एसएन में इनसे उपचार शुरू कराया है। -प्रभु एन सिंह,  जिलाधिकारी
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