आगरा में कोरोना वैक्सीन लगातीं स्वास्थ्यकर्मी
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दुनियाभर के देश भारतीय वैक्सीन के लिए तरस रहे हैं, वहीं ताजनगरी में टीकाकरण के लिए लोगों में जागरूकता की कमी है। बूथों पर तय लोगों के टीकाकरण कराने न आने से वैक्सीन की 8671 डोज बरबाद हो गईं। इससे सरकार का 21.67 लाख रुपये का नुकसान हुआ और आगरा में टीकाकरण की दर भी पिछड़ गई।
जिला टीकाकरण प्रभारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि ताजनगरी में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ। 30 मार्च तक 1,18,759 लोगों को टीका लग चुका है। इनके लिए 12,743 वाइल खोलनी पड़ी, जिसमेें 1,27,430 डोज निकली। इसके सापेक्ष में बूथों पर 1,18,759 लोग ही वैक्सीन लगवाने के लिए आए। इससे 8,671 लोगों की डोज बच गई और इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। मजबूरी में इनको नष्ट कराना पड़ा।
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लोग आते तो बचते 21,67,750 रुपये
बचे हुए लोग भी टीका कराने आते तो टीकाकरण की दर बढ़ती और सरकार का 21.67 लाख रुपये भी बचते। दरअसल, निजी अस्पताल में टीकाकरण कराने के लिए 250 रुपये शुल्क देना पड़ रहा है। ऐसे में 8671 डोज की कीमत 21,67,750 रुपये होती है। आगे के टीकाकरण दिवस में वैक्सीन बरबाद न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लोगों से अपनी बारी आने पर टीका करवाने की अपील कर रहे हैं।